UP Voter List: उत्तर प्रदेश में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बाद वोटर लिस्ट से नाम हटाने को लेकर राजनीति तेज़ हो गई है। जब 2024 के लोकसभा चुनावों के नतीजों का ज़िला-वार वोटर लिस्ट से नाम हटाने के आंकड़ों के साथ विश्लेषण किया जाता है, तो समाजवादी पार्टी (SP) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) द्वारा जीती गई सीटों में नाम हटाने के स्तर में साफ़ अंतर दिखता है। यह बहस 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों पर इसके संभावित असर के कारण भी महत्वपूर्ण है।
SP द्वारा जीती गई सीटों में कितने नाम हटाए गए?
समाजवादी पार्टी द्वारा जीते गए ज़्यादातर ज़िलों में वोटर लिस्ट से नाम हटाने का प्रतिशत आम तौर पर 15 से 25 प्रतिशत के बीच था। कन्नौज में लगभग 21.57 प्रतिशत नाम हटाए गए, मैनपुरी में 16.17 प्रतिशत और शामली ज़िले (जिसमें कैराना शामिल है) में 16.75 प्रतिशत। मुज़फ़्फ़रनगर में 16.29 प्रतिशत, मुरादाबाद में 15.76 प्रतिशत और रामपुर में 18.29 प्रतिशत वोटरों के नाम हटाए गए।
संभल में यह आंकड़ा 20.29 प्रतिशत था, फ़िरोज़ाबाद में 18.13 प्रतिशत और बदायूं में 20.39 प्रतिशत। खीरी और धौरहरा दोनों लोकसभा सीटों पर लगभग 17.50 प्रतिशत नाम हटाए गए। इस बीच लखनऊ ज़िले में, जिसमें मोहनलालगंज सीट शामिल है, सबसे ज़्यादा वोटरों के नाम-30.04 प्रतिशत से ज़्यादा-ड्राफ़्ट लिस्ट से हटाए गए।
क्या BJP द्वारा जीती गई सीटों में ज़्यादा नाम हटाए गए?
BJP द्वारा जीते गए कई ज़िलों में, वोटर लिस्ट से नाम हटाने का स्तर तुलनात्मक रूप से ज़्यादा था। मेरठ में 24.65 प्रतिशत, गाज़ियाबाद में 28.83 प्रतिशत और गौतम बुद्ध नगर में 23.98 प्रतिशत नाम हटाए गए। कानपुर नगर में 25.50 प्रतिशत, आगरा में 23.25 प्रतिशत और प्रयागराज (फूलपुर) में 24.64 प्रतिशत नाम हटाए गए।
लखनऊ में, जिस पर दोनों प्रमुख पार्टियों की कड़ी नज़र थी, 30 प्रतिशत से ज़्यादा नाम हटाए गए, जिसे सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा माना जा रहा है। इसके अलावा शाहजहांपुर, बहराइच, गोंडा, सिद्धार्थनगर और गोरखपुर जैसे जिलों में 17 से 22 प्रतिशत वोटरों के नाम भी वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं।
2027 के विधानसभा चुनावों पर इसका क्या असर होगा?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन आंकड़ों के आधार पर यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि किस पार्टी को फायदा होगा या नुकसान। सीनियर पत्रकार योगेश मिश्रा के अनुसार, “जब तक यह साफ नहीं हो जाता कि किन समुदायों, किन इलाकों और किन पोलिंग बूथों से वोटरों के नाम हटाए गए हैं तब तक यह कहना मुश्किल है कि किसे नुकसान हुआ है। सिर्फ़ प्रतिशत के आधार पर नतीजे निकालना सही नहीं होगा।”
हालांकि विपक्ष का आरोप है कि बड़े पैमाने पर नाम हटाने से चुनावी संतुलन बिगड़ सकता है, जबकि चुनाव आयोग का कहना है कि मृत दूसरी जगह चले गए और डुप्लीकेट वोटरों के नाम हटाकर लिस्ट को साफ किया गया है।
आगे क्या होगा?
ड्राफ्ट लिस्ट जारी होने के बाद दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया चल रही है। जिन वोटरों के नाम हटा दिए गए हैं, उन्हें तय समय सीमा के अंदर ज़रूरी दस्तावेज़ जमा करके अपने नाम दोबारा जुड़वाने का मौका मिलेगा। इसलिए, 2027 के राजनीतिक माहौल पर असली असर फाइनल वोटर लिस्ट जारी होने के बाद ही साफ होगा।














