Ajit Pawar: महाराष्ट्र की राजनीति में बुधवार को एक बड़ा सदमा लगा जब बारामती में हुई विमान दुर्घटना में राज्य के उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता अजित पवार का निधन हो गया। यह दुखद घटना उस समय हुई जब वह जिले में चुनाव प्रचार कार्यक्रमों में भाग लेने जा रहे थे।
कैसे हुई घटना?
सूत्रों के अनुसार, अजित पवार बारामती तालुका में जिला परिषद और पंचायत समिति के चुनाव प्रचार के सिलसिले में कई जनसभाओं को संबोधित करने वाले थे। विमान क्रैश की सूचना मिलते ही पूरे महाराष्ट्र में शोक की लहर दौड़ गई। राजनीतिक हलकों में इस खबर ने सभी को स्तब्ध कर दिया है।
कौन थे अजित पवार?
अजित पवार एनसीपी के प्रमुख नेता और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री थे। वह पार्टी संस्थापक शरद पवार के भतीजे थे। 22 जुलाई 1959 को अहमदनगर जिले के देवलाली प्रवारा में जन्मे अजित पवार ने शिवाजी विश्वविद्यालय से बीकॉम की डिग्री हासिल की थी। उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत पारिवारिक परंपरा के अनुसार गन्ना सहकारी समितियों से की थी।
राजनीतिक सफर
1991 में अजित पवार पहली बार बारामती से सांसद चुने गए। हालांकि, छह महीने बाद ही उन्होंने सांसद पद छोड़कर विधानसभा चुनाव लड़ने का फैसला किया। 1999 में जब शरद पवार ने कांग्रेस छोड़कर एनसीपी की स्थापना की, तब अजित भी उनके साथ नई पार्टी में शामिल हुए।
महज 40 साल की उम्र में अजित पवार महाराष्ट्र के सबसे युवा कैबिनेट मंत्री बने। उन्हें सिंचाई मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई, जहां वह करीब एक दशक तक रहे। 2010 में उन्होंने छगन भुजबल की जगह उपमुख्यमंत्री का पद संभाला। पिछले वर्ष, अजित पवार ने अपने चाचा शरद पवार से अलग होकर भाजपा-शिवसेना गठबंधन की सरकार में शामिल होने का फैसला लिया, जिसके बाद उन्हें दोबारा उपमुख्यमंत्री बनाया गया था।
क्यों कह जाता है उन्हें दादा?
अजित पवार, जिन्हें लोग प्यार से ‘दादा’ कहते थे, एक महत्वाकांक्षी और स्पष्टवादी नेता के रूप में जाने जाते थे। राजनीतिक जानकारों का मानना था कि उनकी नजर हमेशा से मुख्यमंत्री पद पर रही। उनकी मां आशा पवार ने एक बार इच्छा जताई थी कि वह अपने जीवनकाल में अजित को मुख्यमंत्री बनते देखना चाहती हैं।
राजनीति करियर
अजित पवार के पिता अनंतराव पवार मशहूर फिल्म निर्देशक वी. शांताराम के साथ राजकमल स्टूडियो में काम करते थे। हालांकि, अजित ने फिल्म इंडस्ट्री के बजाय राजनीति को अपना करियर चुना। उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार और दो बेटे पार्थ पवार तथा जय पवार हैं। पार्थ पवार 2019 में मावल से लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं। पवार परिवार की जड़ें महाराष्ट्र के सातारा जिले से हैं। 18वीं सदी में पड़े भयानक सूखे के बाद परिवार बारामती के काटेवाडी इलाके में बस गया, जहां उन्होंने गन्ने की खेती में खास पहचान बनाई।








