Rahul Gandhi: रायबरेली दौरे के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी को एक ऐसा तोहफा मिला जिसने उन्हें बहुत इमोशनल कर दिया। यह कोई आम तोहफा नहीं था, बल्कि उनके दादा और स्वतंत्रता सेनानी फिरोज गांधी का पुराना ड्राइविंग लाइसेंस था। इस ऐतिहासिक दस्तावेज़ को देखकर राहुल गांधी कुछ पलों के लिए भावुक हो गए और मंच पर ही उसे ध्यान से देखा। इसके बाद उन्होंने तुरंत इसकी एक तस्वीर अपनी मां सोनिया गांधी और बहन प्रियंका गांधी को WhatsApp पर भेजी।
यह भावुक पल तब हुआ जब राहुल गांधी रायबरेली के भुएमऊ गेस्ट हाउस से राजीव गांधी स्टेडियम पहुंचे। वह वहां रायबरेली प्रीमियर लीग क्रिकेट टूर्नामेंट का उद्घाटन करने आए थे। इस कार्यक्रम के दौरान, मंच पर मौजूद विकास सिंह और उनके परिवार ने राहुल गांधी को यह ऐतिहासिक ड्राइविंग लाइसेंस भेंट किया। लाइसेंस मिलने पर राहुल गांधी ने उसे ध्यान से देखा और उनके चेहरे पर भावनाएं साफ दिख रही थीं।
यह पुश्तैनी चीज़ परिवार ने सालों से संभाल कर रखी थी।
अमेठी के सांसद किशोरी लाल शर्मा ने भी इस पूरी घटना की पुष्टि की। लाइसेंस देने वाले विकास सिंह ने बताया कि यह कीमती पुश्तैनी चीज़ उनकी पत्नी जूही सिंह ने सालों से संभाल कर रखी थी। जूही सिंह समाजवादी पार्टी की महिला विंग की प्रदेश कार्यकारिणी की महासचिव भी हैं। परिवार के लिए यह सिर्फ एक दस्तावेज़ नहीं, बल्कि इतिहास का एक टुकड़ा था।
फिरोज गांधी का ड्राइविंग लाइसेंस कैसे मिला
विकास सिंह ने बताया कि यह ड्राइविंग लाइसेंस पहले राम कुमार त्रिवेदी के पास था। यह फिरोज गांधी कॉलेज में एक हेलीपैड के निर्माण के दौरान मिला था। राम कुमार त्रिवेदी ने इसे सुरक्षित रखा और हमेशा चाहते थे कि यह लाइसेंस एक दिन गांधी परिवार तक पहुंचे।
हालांकि, एक आम आदमी के लिए गांधी परिवार से सीधे संपर्क करना आसान नहीं था। इस बीच उनकी पत्नी की दोस्त साक्षी त्रिवेदी ने यह जिम्मेदारी ली और सही मौके का इंतजार किया। आखिरकार राहुल गांधी के रायबरेली दौरे के दौरान यह सपना सच हुआ और फिरोज गांधी का ड्राइविंग लाइसेंस उनके पोते राहुल गांधी तक पहुंच गया।
राहुल गांधी की भावुक प्रतिक्रिया
लाइसेंस मिलने पर राहुल गांधी कुछ देर मंच पर खड़े होकर उसे देखते रहे। फिर उन्होंने अपने मोबाइल फोन से उसकी एक तस्वीर ली और तुरंत सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी को भेज दी। मंच पर मौजूद लोग भी यह देखकर भावुक हो गए। यह पल राजनीति से परे था; यह एक परिवार और उसकी विरासत के बारे में था।
विकास सिंह ने कहा, “यह लाइसेंस हमारी ज़िम्मेदारी थी। जब भी मौका मिला, इसे गांधी परिवार को लौटाना हमारा फर्ज़ था।” अब यह ड्राइविंग लाइसेंस गांधी परिवार के लिए सिर्फ़ एक ऐतिहासिक दस्तावेज़ से कहीं ज़्यादा बन गया है; यह एक इमोशनल यादगार है जो फिरोज गांधी की यादों को ज़िंदा रखती है।













