Bijnor, Uttar Pradesh: यह खबर सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि एक ऐसी प्रेम कहानी का अंत है जिसे न तो परिवार समझ पाया और न ही समाज थाम सका। रात के अंधेरे में घर से निकली शिवानी कश्यप और अंशुल कश्यप आखिरी बार जिस हालत में मिले, उसने पूरे इलाके को सन्न कर दिया। चांदपुर कस्बे में सुबह जब लोग खेत की तरफ गए, तो वहां जो दिखाई दिया, उसने हर किसी की सांसें रोक दीं।
जो दिखाई दिया, वो किसी ने सोचा भी नहीं था
शिवानी की गोदभराई होनी थी। घर में सजावट, रिश्तेदारों की भीड़ और शादी की तारीख तय होने की खुशी। लेकिन यह खुशी सिर्फ ऊपर-ऊपर थी। अंदर कुछ टूट रहा था, जो किसी को दिखाई नहीं दिया। रात को शिवानी चुपचाप निकली और घर से सिर्फ 50 मीटर दूर खेत की तरफ चली गई। उसी समय अंशुल भी अपने घर से निकला। दोनों एक ही रास्ते पर, एक ही जगह पहुंचे। सुबह जब ग्रामीण पहुंचे तो दोनों जिस हाल में मिले, उसने पूरे गांव को खामोशी में धकेल दिया।
शिवानी–अंशुल के बीच किस तरह का रिश्ता था
अंशुल 21 साल का था। स्नातक का छात्र। शांत, कम बोलने वाला, लेकिन शिवानी के लिए दुनिया छोड़ देने वाला। शिवानी अपने परिवार के साथ रहती थी, घर के कामकाज में हाथ बंटाती थी। दोनों कश्यप समाज से थे। दोनों की उम्र भी करीब। पड़ोस के ही घर। रोज मिलना, बात करना और फिर वही बात जो हर प्रेम कहानी में होती है लगाव, मोहब्बत, और साथ रहने की जिद।
लेकिन परिवार मानने को तैयार नहीं थे। शिवानी का रिश्ता कहीं और तय कर दिया गया। गोदभराई की तारीख निकाल दी गई। पर अंदर से शिवानी टूट रही थी। अंशुल भी। दोनों जानते थे कि सुबह होने से पहले उनकी दुनिया बदल जाएगी।
गोदभराई वाली रात सबसे भारी साबित हुई
गोदभराई का कार्यक्रम था, मगर शिवानी उस सजावट का हिस्सा नहीं बनना चाहती थी। वह उसी से शादी करना चाहती थी जिसके साथ उसने सपने देखे थे। रात हुई और दोनों अपने-अपने घर से बाहर निकल आए। खेत में जाकर दोनों ने ऐसा कदम उठा लिया जिसका असर सिर्फ दो घरों पर नहीं, पूरे गांव पर पड़ा।
सुबह ग्रामीणों ने पेड़ से लटकते हुए दोनों के शव देखे। खबर फैलते ही गांव, परिवार और पूरी कश्यप बस्ती में हाहाकार मच गया। रोने की आवाजें पूरे मोहल्ले में गूंजने लगीं।
पुलिस जांच और परिवार का दर्द
सुबह घटनास्थल पर एसपी ग्रामीण डॉक्टर प्रकाश सिंह, सीओ देश दीपक और पुलिस टीम पहुंची। फोरेंसिक जांच भी हुई। दोनों के शव पोस्टमॉर्टम के लिए भेजे गए।
एसपी ग्रामीण ने बताया कि दोनों के बीच प्रेम संबंध थे और दोनों शादी करना चाहते थे। परिवार राज़ी नहीं था और लड़की की शादी दूसरी जगह तय कर दी गई थी।
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समाज इन घटनाओं को क्यों नहीं रोक पाता
यह सवाल हर ऐसे मामले के बाद उठता है। दोनों एक ही समाज से थे, पढ़ाई भी चल रही थी, परिवार भी जानता था कि दोनों एक-दूसरे से बात करते हैं। लेकिन फिर भी कहानी का अंत हमेशा ऐसा ही क्यों होता है। प्रेम कहानियों में सबसे बड़ी लड़ाई परिवार और समाज की सोच से होती है। शिवानी और अंशुल भी हार गए। आखिर में सिर्फ खामोशी बची।














