उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में नशीले कफ सिरप की अवैध तस्करी से जुड़े मामले में एसआईटी की जांच लगातार चौंकाने वाले खुलासे कर रही है। जांच के दौरान सामने आया है कि इस नेटवर्क से जुड़े मुख्य स्टॉकिस्ट शैली ट्रेडर्स ने पिछले दो वर्षों में करीब 425 करोड़ रुपये का संदिग्ध वित्तीय लेन-देन किया है। यह रकम इस अवैध कारोबार की गंभीरता और बड़े स्तर पर फैले नेटवर्क की ओर इशारा करती है।
एसआईटी की रिपोर्ट के अनुसार, यह लेन-देन सामान्य मेडिकल सप्लाई कारोबार की सीमा से कहीं अधिक है, जिससे साफ होता है कि कोडीन युक्त कफ सिरप की अवैध बिक्री संगठित रूप से की जा रही थी।
शुभम जायसवाल और उसके पिता पर कसता शिकंजा
इस पूरे गिरोह का केंद्र माने जा रहे शुभम जायसवाल और उनके पिता भोला प्रसाद जायसवाल, जो शैली ट्रेडर्स नाम से फर्म संचालित करते हैं, अब जांच एजेंसियों के रडार पर हैं। जांच में उनकी फर्म की बैंकिंग और टैक्स से जुड़ी गतिविधियों में कई गंभीर अनियमितताएं पाई गई हैं।
इसी कड़ी में सोनभद्र पुलिस ने वाराणसी निवासी चार्टर्ड अकाउंटेंट विष्णु अग्रवाल को भी नोटिस जारी किया है, जो शैली ट्रेडर्स के अकाउंट्स संभालते थे। उनसे संदिग्ध खातों और लेन-देन को लेकर जवाब मांगा गया है।
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कई मेडिकल स्टोर और ड्रग एजेंसियों को नोटिस
एसआईटी की जांच अब केवल एक फर्म तक सीमित नहीं रही है। अवैध कफ सिरप नेटवर्क से जुड़े कई मेडिकल स्टोर और ड्रग एजेंसियों को भी नोटिस जारी किए गए हैं, जिनमें प्रमुख हैं
- मां कृपा मेडिकल स्टोर, सोनभद्र
- शिविक्षा फर्म, सोनभद्र
- दिलीप मेडिकल एजेंसी, नई बाजार भदोही
- आयुष इंटरप्राइजेज
- राजेंद्र एंड संस ड्रग एजेंसी, परसीपुर
- अंकिता गुप्ता द्वारा संचालित शिविक्षा फर्म
इन सभी प्रतिष्ठानों से कफ सिरप की खरीद-बिक्री, स्टॉक रजिस्टर, बिल और लाइसेंस से जुड़े दस्तावेज मांगे गए हैं।
425 करोड़ रुपये की रकम कहां गई?
जांच में सबसे बड़ा सवाल यही है कि मेडिकल सप्लाई जैसे सीमित कारोबार में 425 करोड़ रुपये का लेन-देन आखिर कैसे हुआ। एसआईटी को शक है कि यह रकम
- फर्जी इनवॉइस के जरिए
- गैर-लाइसेंसी मेडिकल स्टोरों के माध्यम से
- नकली फर्मों और बेनामी खातों से
- और हवाला नेटवर्क के जरिए घुमाई गई
अब यह भी जांच की जा रही है कि यह पैसा आगे किन अवैध गतिविधियों में इस्तेमाल हुआ।
एसपी ने दी बड़ी कार्रवाई के संकेत
सोनभद्र के पुलिस अधीक्षक अभिषेक वर्मा ने कहा कि 425 करोड़ के लेन-देन का खुलासा अभी जांच की शुरुआती परत है। उन्होंने साफ कहा कि पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच जारी है और इसमें शामिल सभी लोगों पर सख्त कार्रवाई होगी। आने वाले दिनों में और बड़े नाम सामने आ सकते हैं।
क्यों बढ़ रही है नशीले कफ सिरप की तस्करी?
विशेषज्ञों के अनुसार, कफ सिरप में मौजूद कोडीन फॉस्फेट जैसे नशीले तत्व इसका दुरुपयोग आसान बनाते हैं। सस्ते नशे के रूप में इसकी मांग बढ़ने के कारण
नकली बिलिंग फर्जी मेडिकल लाइसेंस अवैध सप्लाई चेन और अंतरजिला तस्करी तेजी से बढ़ी है
सोनभद्र और आसपास के जिलों में यह नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय था, लेकिन पहली बार इतने बड़े पैमाने पर इसका वित्तीय खुलासा हुआ है।














