Sambhal Violence Case: संभल हिंसा मामले में एक बार फिर सियासत और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। चंदौसी की CJM कोर्ट ने इस मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए तत्कालीन CO अनुज चौधरी, इंस्पेक्टर अनुज तोमर समेत 12 पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज करने के आदेश दिए हैं। यह आदेश घायल युवक आलम के पिता यामीन द्वारा दाखिल याचिका पर दिया गया है।
कोर्ट के इस फैसले के बाद न सिर्फ पुलिस महकमे में हलचल मच गई है, बल्कि पीड़ित परिवार की ओर से भी गंभीर आरोप सामने आने लगे हैं।
क्या है संभल हिंसा का मामला
याचिका के अनुसार, संभल हिंसा के दौरान आलम गंभीर रूप से घायल हो गया था। परिवार का आरोप है कि उस समय पुलिस द्वारा अत्यधिक बल प्रयोग किया गया, जिससे आलम को गंभीर चोटें आईं। मामले में कार्रवाई न होने से नाराज होकर पीड़ित पिता यामीन ने न्यायालय की शरण ली थी।
CJM कोर्ट ने पूरे प्रकरण को गंभीर मानते हुए पुलिस अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश जारी किया है। कोर्ट का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए प्राथमिकी दर्ज होना जरूरी है।
पीड़ित की बहन का बड़ा खुलासा
कोर्ट के आदेश के बाद अब यामीन की बेटी और घायल आलम की बहन कैमरे के सामने आई है। उसने मीडिया से बातचीत में कई चौंकाने वाले आरोप लगाए हैं। पीड़िता का कहना है कि घटना के बाद परिवार पर दबाव बनाया गया और शिकायत वापस लेने की कोशिश की गई।
उसने दावा किया कि घायल आलम की हालत गंभीर थी, लेकिन समय पर सही इलाज और न्याय नहीं मिला। परिवार का आरोप है कि अगर शुरुआत में ही निष्पक्ष जांच होती, तो उन्हें कोर्ट का दरवाजा नहीं खटखटाना पड़ता।
कोर्ट के आदेश से बढ़ी हलचल
CJM कोर्ट के इस आदेश को संभल हिंसा मामले में एक अहम मोड़ माना जा रहा है। आमतौर पर पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR के आदेश दुर्लभ माने जाते हैं, ऐसे में यह फैसला कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर काफी महत्वपूर्ण है।
आगे क्या होगा
अब इस मामले में पुलिस को अदालत के आदेश के अनुसार FIR दर्ज कर आगे की जांच करनी होगी। जांच की दिशा क्या होगी और आरोपों की सच्चाई क्या सामने आती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।
संभल हिंसा केस अब सिर्फ एक स्थानीय मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह पुलिस जवाबदेही और न्यायिक प्रक्रिया से जुड़ा बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।














