Beijing: चीन ने अपने नौसैनिक बेड़े में तीसरा और अब तक का सबसे उन्नत एयरक्राफ्ट कैरियर ‘फुजियान’ (Fujian) शामिल कर लिया है। बीजिंग में आयोजित गोपनीय समारोह में खुद राष्ट्रपति शी जिनपिंग मौजूद थे। यह कैरियर चीन की सैन्य क्षमताओं में एक बड़ा कदम माना जा रहा है क्योंकि यह इलेक्ट्रोमैग्नेटिक एयरक्राफ्ट लॉन्च सिस्टम (EMALS) से लैस है वही तकनीक जो अभी तक केवल अमेरिका के USS Gerald R. Ford में मौजूद थी।
‘फुजियान’ को चीन का सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर कहा जा रहा है, जिसका वजन लगभग 80,000 टन है। यह उन्नत कैटापल्ट सिस्टम की मदद से लड़ाकू विमानों को पारंपरिक तरीकों से अधिक कुशलता और तेजी से उड़ान भरने में सक्षम बनाता है। इस पर आधारित विमान जैसे J-15T, J-35 और KJ-600 ने पहले ही इसके डेक से सफल उड़ान और लैंडिंग अभ्यास पूरे कर लिए हैं।
अमेरिका के लिए बढ़ी चिंता
अमेरिका और चीन के बीच चल रहे भू-राजनीतिक तनाव के बीच यह कदम रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है। अमेरिकी रिपोर्टों के अनुसार, चीन अब चौथा एयरक्राफ्ट कैरियर भी बना रहा है, जो संभवतः परमाणु ऊर्जा से संचालित होगा। इस तकनीक से उसकी नौसेना की वैश्विक पहुंच और बढ़ जाएगी।
तैनाती की दिशा और रणनीति
विश्लेषकों का मानना है कि चीन इस एयरक्राफ्ट कैरियर को ताइवान स्ट्रेट या दक्षिण चीन सागर में तैनात कर सकता है, जहां क्षेत्रीय विवाद लंबे समय से जारी हैं। ताइवान को चीन अपनी भूमि का हिस्सा मानता है और इस क्षेत्र में लगातार सैन्य दबाव बनाए रखता है।
फुजियान की तैनाती से चीन की मौजूदगी हिंद महासागर और अरब सागर तक भी मजबूत हो सकती है। यहां चीन पहले से ही जिबूती, ग्वादर (पाकिस्तान) और हंबनटोटा (श्रीलंका) जैसे ठिकानों के जरिये अपनी रणनीतिक पकड़ बढ़ा रहा है। यह भारत के लिए भी चिंता का विषय हो सकता है क्योंकि भारत की नौसेना भी इन्हीं क्षेत्रों में सक्रिय रहती है।
चीन की बढ़ती नौसैनिक क्षमता
बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, चीन अब 234 युद्धपोतों के साथ दुनिया का सबसे बड़ा परिचालन नौसैनिक बेड़ा रखता है, जबकि अमेरिका के पास 219 हैं। इस लिहाज से, ‘फुजियान’ का शामिल होना चीन की नौसैनिक शक्ति को नई ऊंचाई पर पहुंचाता है।
नया युग, नई क्षमता
चीनी रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, फुजियान के शामिल होने से पीपुल्स लिबरेशन आर्मी नेवी (PLAN) अब तटीय रक्षा से आगे बढ़कर दूर-दराज़ समुद्री अभियानों के लिए तैयार है। इसकी उन्नत तकनीक न केवल युद्ध क्षमता बढ़ाएगी बल्कि चीन की वैश्विक सैन्य उपस्थिति को भी मजबूत करे














