Patna: बिहार की राजनीति में लालू प्रसाद यादव सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि एक पूरा दौर रहे हैं। बिहार की राजनीति में लालू प्रसाद यादव का नाम सिर्फ एक नेता के रूप में नहीं, बल्कि एक राजनीतिक युग के तौर पर लिया जाता है। RJD की पहचान और स्वभाव उनके इर्द-गिर्द ही बना। लेकिन लालू की सेहत और उम्र ने उन्हें सक्रिय राजनीति से दूर कर दिया है। पार्टी की कमान अब तेजस्वी यादव के पास है और यहीं से परंपरा और बदलाव के बीच टकराव शुरू हुआ।
रोहिणी आचार्य का खुला विद्रोह
हाल ही में रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पर जिस तरह के बयान दिए, उसने पूरे राजनीतिक माहौल को हिला दिया। उनके निशाने पर विरोधी नहीं, बल्कि अपना ही परिवार और पार्टी थी। उन्होंने संगठन के अंदर बढ़ते अवसरवाद, अहंकार और पक्षपात पर सवाल उठाए। उनके पोस्ट ने यह साफ कर दिया कि परिवार के भीतर असंतोष गहरा है और वह अब छिपाने की हालत में नहीं।
कल मुझे गालियों के साथ बोला गया कि मैं गंदी हूँ और मैंने अपने पिता को अपनी गंदी किडनी लगवा दी , करोड़ों रूपए लिए , टिकट लिया तब लगवाई गंदी किडनी .. सभी बेटी – बहन , जो शादीशुदा हैं उनको मैं बोलूंगी कि जब आपके मायके में कोई बेटा – भाई हो , तो भूल कर भी अपने भगवान रूपी पिता को…
— Rohini Acharya (@RohiniAcharya2) November 16, 2025
रोहिणी आचार्य का बड़ा आरोप
RJD प्रमुख लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने एक बार फिर परिवार और पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। शनिवार को घर से निकलने के बाद उन्होंने कहा कि उनका अब कोई परिवार नहीं है और उन्हें उन्हीं लोगों ने घर से निकाल दिया है।
कल एक बेटी, एक बहन , एक शादीशुदा महिला , एक माँ को जलील किया गया , गंदी गालियाँ दी गयीं , मारने के लिए चप्पल उठाया गया , मैंने अपने आत्मसम्मान से समझौता नहीं किया, सच का समर्पण नहीं किया , सिर्फ और सिर्फ इस वजह से मुझे बेइज्जती झेलनी पडी ..
कल एक बेटी मजबूरी में अपने रोते हुए…— Rohini Acharya (@RohiniAcharya2) November 16, 2025
रोहिणी ने दावा किया कि संजय और रमीज का नाम लेने पर उन्हें परेशान किया जाता है। उन्होंने राजनीति छोड़ने की बात करते हुए कहा कि पार्टी की गिरती हालत पर कोई जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है। उनके आरोपों ने RJD की अंदरूनी लड़ाई को और खुलकर सामने ला दिया है।
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तेज प्रताप यादव को किया बेदखल
लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव को एक बार फिर परिवार से बाहर कर दिया गया है। मई 2025 में सोशल मीडिया पर एक महिला के साथ तस्वीर पोस्ट करने और “12 साल की प्रेमिका” बताने के विवाद के बाद लालू परिवार ने उन्हें पार्टी और घर दोनों से निकाल दिया। तेज प्रताप ने दावा किया कि उनका अकाउंट हैक हुआ था, लेकिन परिवार ने इसे स्वीकार नहीं किया। बेदखली के बाद उन्होंने बगावत करते हुए अपनी नई पार्टी बनाई और महुआ से चुनाव लड़ा, हालांकि उन्हें हार का सामना करना पड़ा। प्रचार के दौरान उन्होंने तेजस्वी और उनके सलाहकारों पर खुलकर हमले किए।
तेज प्रताप की भूमिका और सियासी संकेत
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जब तेज प्रताप यादव को इस बात का पता चला तो उन्होंने भावनात्मक अंदाज में बहन का समर्थन किया। तेज प्रताप पहले भी पार्टी और तेजस्वी की कार्यशैली से नाराज रहते आए हैं, लेकिन इस बार उन्होंने इशारों में संकेत दिया कि परिवार के भीतर सत्ता और सम्मान को लेकर असमानता है। यह बयान सिर्फ भावुकता नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश था। आपको बता दे कि तेज प्रताप महुआ विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे थे जहां उनको हार का सामना करना पड़ा है।
पार्टी की चिंता: परिवार में फूट, संगठन पर असर
RJD का ढांचा हमेशा परिवार और संगठन के मिश्रण से चला है। लेकिन अब पहली बार दोनों अलग-अलग दिशाओं में जा रहे हैं। कई वरिष्ठ नेता असहज हैं कि उन्हें किस धड़े के साथ खड़ा होना चाहिए। तेजस्वी के पास संगठन की पकड़ है, लेकिन रोहिणी और तेज प्रताप की सार्वजनिक नाराजगी पार्टी की एकजुटता पर सवाल उठाती है।















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