Bangladesh Violence: बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं के खिलाफ हिंसा की घटनाएं एक बार फिर सुर्खियों में हैं। राजबाड़ी जिले के पांग्शा इलाके में एक भीड़ ने एक हिंदू युवक की पीट-पीटकर हत्या कर दी। मृतक की पहचान अमृत मंडल उर्फ सम्राट के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि यह घटना 24 दिसंबर, 2025 को हुई। पुलिस के दावों और स्थानीय लोगों के बयानों को लेकर कई सवाल उठाए जा रहे हैं।
पुलिस का दावा: रंगदारी के आरोप में हमला
द डेली स्टार की एक रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस का दावा है कि अमृत मंडल पर रंगदारी मांगने का आरोप था, और इसी वजह से गांव वालों ने उस पर हमला किया। पुलिस के अनुसार, अमृत मंडल ने कथित तौर पर “सम्राट वाहिनी” नाम का एक ग्रुप बनाया था, जो आसपास के इलाकों में रंगदारी वसूलता था। पुलिस ने दावा किया कि उसके खिलाफ पहले से ही दो आपराधिक मामले दर्ज थे, जिनमें से एक हत्या का मामला भी शामिल था।
एक साथी गिरफ्तार, हथियार बरामद
घटना के बाद, पुलिस ने अमृत मंडल के एक साथी मोहम्मद सलीम को हिरासत में लिया है। बताया जा रहा है कि उसके पास से एक पिस्तौल और अन्य हथियार बरामद किए गए हैं। पुलिस का कहना है कि वे मामले की गहन जांच कर रहे हैं और सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।
गांव वालों का बयान: अलार्म बजने के बाद भीड़ जमा हुई
स्थानीय लोगों के अनुसार, अमृत मंडल कथित तौर पर हुसैनडांगा के पुराने बाजार इलाके में एक घर में गया और फिरौती की मांग की। जब घर के मुखिया ने पैसे देने से इनकार कर दिया, तो उसके साथियों ने कथित तौर पर घर में घुसकर परिवार वालों के साथ मारपीट शुरू कर दी। इसी दौरान, परिवार के सदस्यों ने “चोर, चोर” चिल्लाकर अलार्म बजाया, जिसके बाद गांव वाले मौके पर पहुंचे और अमृत मंडल को पीटा। भीड़ के हमले में वह गंभीर रूप से घायल हो गया।
अस्पताल में मौत, बढ़ता तनाव
पुलिस अमृत मंडल को गंभीर हालत में अस्पताल ले गई, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस घटना ने एक बार फिर बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। इससे पहले, दीपू चंद्र दास की पीट-पीटकर हत्या और शव जलाने की घटना भी सामने आई थी, जिसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निंदा हुई थी।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया की आशंका
दीपू दास मामले के बाद, भारत सहित कई देशों में तत्कालीन सरकार और प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए थे। हाल की घटना के बाद भी, यह चिंता है कि अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर सवाल और तेज होंगे, खासकर मौजूदा राजनीतिक माहौल में जहां मुहम्मद यूनुस सरकार अंतरराष्ट्रीय दबाव का सामना कर रही है।
जांच जारी है
पुलिस का कहना है कि निष्पक्ष जांच की जाएगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, मानवाधिकार संगठन और अल्पसंख्यक समुदाय इस जांच पर करीब से नज़र रख रहे हैं।














