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Basant Panchami: बसंत पंचमी पर क्यों पहनते हैं पीले कपड़े? जानिए पीले रंग का धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व

On: January 23, 2026 10:34 AM
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Basant Panchami
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Basant Panchami: बसंत पंचमी को हिंदू धर्म में एक बहुत ही शुभ और पवित्र त्योहार माना जाता है। यह त्योहार सर्दियों के खत्म होने और वसंत के आगमन का प्रतीक है। 2026 में बसंत पंचमी शुक्रवार, 23 जनवरी को मनाई जाएगी। इस दिन ज्ञान, विद्या, बुद्धि, कला और संगीत की देवी, देवी सरस्वती की पूजा की जाती है। बसंत पंचमी को वसंत पंचमी, सरस्वती पूजा, ज्ञान पंचमी और श्री पंचमी जैसे अन्य नामों से भी जाना जाता है।

सरस्वती पूजा और छात्रों के साथ इसका विशेष संबंध

इस दिन, छात्र, शिक्षक और कला से जुड़े लोग विशेष रूप से देवी सरस्वती की पूजा करते हैं। ऐसा माना जाता है कि बसंत पंचमी पर सही रीति-रिवाजों के साथ पूजा करने से ज्ञान, बेहतर याददाश्त और करियर में सफलता का आशीर्वाद मिलता है। कई जगहों पर यह दिन बच्चे की शिक्षा की शुरुआत का भी प्रतीक है, जिसे ‘विद्यारंभ संस्कार’ के नाम से जाना जाता है।

बसंत पंचमी पर पीले रंग का महत्व

बसंत पंचमी के बारे में सोचते ही जो छवि तुरंत दिमाग में आती है, वह है पीला रंग। इस दिन, हर जगह पीला रंग होता है-लोग पीले कपड़े पहनते हैं, पूजा में पीले फूल चढ़ाते हैं और पीले रंग के व्यंजन और मिठाइयाँ बनाते हैं। हिंदू धर्म और ज्योतिष में, पीले रंग को बहुत शुभ माना जाता है। यह रंग ज्ञान, सकारात्मकता, ऊर्जा और समृद्धि का प्रतीक है।

ज्योतिषीय और धार्मिक महत्व

ज्योतिष के अनुसार पीला रंग बृहस्पति ग्रह से जुड़ा है, जिसे ज्ञान, बुद्धि और धर्म का कारक माना जाता है। देवी सरस्वती भी ज्ञान और बुद्धि की देवी हैं, इसलिए बसंत पंचमी पर पीले रंग का विशेष महत्व है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन पीले रंग को अपनाने से मानसिक शांति मिलती है और बौद्धिक विकास बढ़ता है।

प्रकृति और वसंत से संबंध

बसंत पंचमी का त्योहार वसंत की शुरुआत का प्रतीक है। इस मौसम में, पीले सरसों के फूल खिलते हैं और खेत हरियाली और पीले रंग से भर जाते हैं। पीले रंग को प्रकृति में इस ताजगी, खुशी और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि बसंत पंचमी पर पीले रंग के कपड़े पहनना और उसका उपयोग करना शुभ माना जाता है। परंपरा और भक्ति का प्रतीक

बसंत पंचमी पर पीला रंग पहनना सिर्फ एक परंपरा या फैशन स्टेटमेंट नहीं है, बल्कि यह देवी सरस्वती के प्रति भक्ति और सम्मान का प्रतीक भी है। देवी को पीली मिठाइयाँ, केसर की खीर, बेसन के पकवान और पीले फल चढ़ाए जाते हैं। यह पुरानी परंपरा आज भी बड़े उत्साह के साथ निभाई जाती है।

Ismita Srivastava

इस्मिता श्रीवास्तव हिंदी पत्रकारिता में एक वर्षों का अनुभव रखती हैं। उन्होंने कई प्रमुख मीडिया संस्थानों में कार्य किया है। वर्तमान में वे Aaj Ka Aaina के लिए मनोरंजन और लाइफस्टाइल तथा अन्य विषयों पर तथ्यपूर्ण और रोचक लेख लिखती हैं।

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