Mumbai: रणवीर सिंह अभिनीत फिल्म ‘Dhurandhar’ से बॉक्स ऑफिस पर बड़ी उम्मीदें थीं। शुरुआती रुझान भी मजबूत नजर आ रहे थे, लेकिन रिलीज के साथ ही फिल्म का ऑनलाइन लीक होना फिर से एक गंभीर मुद्दे को सामने ले आया है, वह है पायरेसी। यह केवल एक फिल्म की कमाई का नुकसान नहीं है, बल्कि इससे जुड़ा हर कलाकार, तकनीशियन और पूरा सिनेमा तंत्र प्रभावित होता है।
रिलीज के दिन ही किसी फिल्म का गैरकानूनी प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध हो जाना यह दिखाता है कि डिजिटल सुरक्षा व्यवस्था अब भी पूरी तरह मजबूत नहीं हो पाई है। करोड़ों रुपये की लागत से बनी फिल्म अगर पहले ही दिन चोरी हो जाए, तो यह सिर्फ आर्थिक नुकसान नहीं बल्कि रचनात्मक मेहनत का भी अपमान है।
बॉक्स ऑफिस से आगे बढ़ चुका है पायरेसी का असर
अक्सर पायरेसी को केवल बॉक्स ऑफिस नंबरों के नजरिये से देखा जाता है, लेकिन सच्चाई इससे कहीं ज्यादा गहरी है। एक फिल्म की कमाई पर असर पड़ने का मतलब है कि उसके साथ जुड़े हजारों लोगों की कमाई भी खतरे में पड़ जाती है। सेट पर काम करने वाले तकनीशियन, लाइटमैन, मेकअप आर्टिस्ट और छोटे सिनेमाघरों तक इसका सीधा असर पहुंचता है।
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आज जब थिएटर और ओटीटी के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा चल रही है, ऐसे समय में फिल्म का लीक होना थिएटर संस्कृति पर सीधा हमला माना जा रहा है। इससे दर्शकों को मुफ्त में कंटेंट देखने की आदत लग रही है, जो आने वाले समय में गंभीर संकट पैदा कर सकती है।
“आसान एक्सेस” का भ्रम और सिनेमा को नुकसान
दर्शकों का एक वर्ग पायरेसी को यह कहकर सही ठहराने की कोशिश करता है कि इससे फिल्म “आसान एक्सेस” में मिल जाती है। लेकिन हकीकत यह है कि यही आदत धीरे-धीरे सिनेमा की पूरी रचनात्मक अर्थव्यवस्था को कमजोर कर रही है। जब निर्माता को सही रिटर्न नहीं मिलेगा, तो जोखिम लेकर बड़े और नए प्रयोग करना कम हो जाएगा।
इसका असर यह भी होगा कि छोटे बजट की अच्छी फिल्में बननी बंद हो जाएंगी, क्योंकि निर्माता आर्थिक जोखिम उठाने से डरेंगे।
‘Dhurandhar’ सिर्फ फिल्म नहीं, एक चेतावनी है
‘Dhurandhar’ का लीक होना कोई अलग-थलग घटना नहीं है। इससे पहले भी कई बड़ी फिल्में इसी समस्या का शिकार हो चुकी हैं। लेकिन हर बार हम इसे एक अलग घटना मानकर छोड़ देते हैं। अब यह साफ हो गया है कि यह सिर्फ इंडस्ट्री की समस्या नहीं, बल्कि सरकार, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और दर्शकों सभी की सामूहिक जिम्मेदारी बनती है।
अगर इस दिशा में समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में सिनेमा केवल उपभोग की चीज बनकर रह जाएगा, सृजन का माध्यम नहीं।
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अब क्या जरूरी है?
फिल्म विशेषज्ञों का मानना है कि पायरेसी रोकने के लिए केवल कानूनी कार्रवाई ही नहीं, बल्कि तकनीकी सुरक्षा, डिजिटल मॉनिटरिंग और दर्शकों में जागरूकता भी उतनी ही जरूरी है। जब तक दर्शक खुद यह नहीं समझेंगे कि चोरी से देखा गया कंटेंट पूरे उद्योग को नुकसान पहुंचाता है, तब तक यह समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी।













