New Delhi: नया साल 2026 शुरू होते ही त्योहारों और व्रतों का सिलसिला भी शुरू हो जाएगा। इन्हीं में एक बेहद महत्वपूर्ण तिथि है अमावस्या। हिंदू पंचांग के अनुसार जिस दिन चंद्रमा दिखाई नहीं देता, उस दिन को अमावस्या कहा जाता है। यह तिथि पितरों को समर्पित मानी जाती है और इस दिन पूजा, दान और तर्पण का विशेष महत्व होता है।
श्री लक्ष्मीनारायण एस्ट्रो सॉल्यूशन, अजमेर की निदेशिका और ज्योतिषाचार्या एवं टैरो कार्ड रीडर नीतिका शर्मा के अनुसार, चंद्रमा पृथ्वी का एक चक्कर लगभग 28 दिनों में पूरा करता है। हर 15वें दिन वह पृथ्वी के उस भाग में चला जाता है, जहां से वह दिखाई नहीं देता। इसी खगोलीय स्थिति को अमावस्या कहा जाता है।
अमावस्या का धार्मिक महत्व
ABP की ज्योतिषाचार्या नीतिका शर्मा बताती हैं कि अमावस्या का दिन भगवान के स्मरण और पितरों की पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन किया गया दान सीधे पितरों तक पहुंचता है। गरीबों को भोजन कराना, वस्त्र दान करना और जरूरतमंदों की मदद करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और परिवार में सुख-समृद्धि आती है।
उन्होंने यह भी बताया कि अमावस्या के दिन शराब, मांसाहार और नशीली चीजों से पूरी तरह दूरी बनानी चाहिए। ऐसा करने से नकारात्मक प्रभाव बढ़ता है और पितृ दोष लगने की मान्यता है।
अमावस्या पर क्या करें?
अमावस्या के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। इसके बाद भगवान का ध्यान करें और अपने पितरों का स्मरण करके व्रत रखें। इस दिन किसी बुजुर्ग, गरीब या असहाय व्यक्ति को भोजन कराना अत्यंत पुण्यदायक माना जाता है। तर्पण, जल अर्पण और दीपदान भी विशेष फल देता है।
साल में 12 अमावस्याएं क्यों होती हैं?
अमावस्या शब्द संस्कृत से लिया गया है और यह सीधे चंद्रमा से जुड़ा हुआ है। साल में कुल 12 अमावस्याएं होती हैं। इनमें सबसे बड़ी अमावस्या कार्तिक अमावस्या मानी जाती है, जिस दिन दीपावली का पर्व मनाया जाता है। इसके अलावा पितृपक्ष अमावस्या यानी श्राद्ध अमावस्या का भी विशेष महत्व होता है, जब पितरों का तर्पण किया जाता है।
सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या कहा जाता है, जिसे स्नान और दान की दृष्टि से अत्यंत शुभ माना गया है।
2026 में कब-कब पड़ेगी अमावस्या? जानिए पूरी लिस्ट
- रविवार, 18 जनवरी – माघ अमावस्या
- मंगलवार, 17 फरवरी – फाल्गुन अमावस्या
- गुरुवार, 19 मार्च – चैत्र अमावस्या
- शुक्रवार, 17 अप्रैल – वैशाख अमावस्या
- शनिवार, 16 मई – ज्येष्ठ अमावस्या
- सोमवार, 15 जून – ज्येष्ठ अमावस्या (अधिक)
- मंगलवार, 14 जुलाई – आषाढ़ अमावस्या
- बुधवार, 12 अगस्त – श्रावण अमावस्या
- शुक्रवार, 11 सितंबर – भाद्रपद अमावस्या
- शनिवार, 10 अक्टूबर – अश्विन अमावस्या
- सोमवार, 09 नवंबर – कार्तिक अमावस्या
- मंगलवार, 08 दिसंबर – मार्गशीर्ष अमावस्या














