Bulandshahr: बुलंदशहर के शिव चरण इंटर कॉलेज का छात्र आदित्य कुमार इन दिनों पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। वजह है उसका बनाया हुआ अनोखा AI रोबोट टीचर, जिसे उसने सिर्फ 25 हजार रुपये में तैयार किया है। फिल्म ‘रोबोट’ देखकर प्रेरित हुए आदित्य ने घर पर ही इस तकनीकी कमाल को अंजाम दिया। सबसे खास बात यह है कि यह रोबोट एक महिला टीचर की तरह दिखता है, साड़ी पहने हुए है और स्कूल जाकर बच्चों को पढ़ाता भी है।
‘सोफी टीचर’ बनी बच्चों की फेवरेट
आदित्य ने अपने इस रोबोट का नाम ‘सोफी’ रखा है। स्कूल में बच्चे उसे प्यार से ‘सोफी टीचर’ बुलाते हैं। रोज की तरह सोफी क्लास में जाकर बच्चों के सवाल सुनती है और उन्हें तुरंत जवाब देती है।
छात्रों का कहना है कि सोफी टीचर के साथ पढ़ना एक अनोखा और मजेदार अनुभव है। रोबोट की तेज प्रतिक्रिया और स्पष्ट जवाब बच्चों की पढ़ाई को रोचक बना रहे हैं। स्कूल के शिक्षक भी आदित्य की इस उपलब्धि पर बेहद गर्व महसूस कर रहे हैं।
4 से 5 साल की मेहनत से तैयार हुआ सोफी रोबोट
आदित्य के मुताबिक, सोफी को बनाने में उसे करीब 4 से 5 साल का समय लगा। इस AI रोबोट के अंदर एक खास LLM चिपसेट लगाया गया है, जो इंसानी दिमाग की तरह तेज गति से डेटा प्रोसेस करता है।
कोई भी सवाल पूछो, सोफी तुरंत सही जवाब देती है। यही वजह है कि स्कूल में यह रोबोट बच्चों के लिए तकनीक का नया और आकर्षक अनुभव बन गया है।
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ग्रामीण छात्रों को तकनीक से जोड़ने का सपना
आदित्य चाहता है कि गांव के बच्चे भी आधुनिक तकनीक से पीछे न रहें। उसका मानना है कि ऐसी जगहों पर जहां टीचर छुट्टी पर होते हैं, वहां रोबोट टीचर बच्चों की पढ़ाई जारी रख सकते हैं।
आगे चलकर वह एक ऐसा 3D ह्यूमनॉइड रोबोट बनाना चाहता है जो बोल सके, सुन सके, लिख सके, इमोशन्स समझ सके और बच्चों की मनोदशा के हिसाब से उन्हें गाइड कर सके।
कम बजट में बड़ी उपलब्धि
शिव चरण इंटर कॉलेज के स्टाफ का कहना है कि आदित्य ने जो कर दिखाया है, वह बड़े-बड़े टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट भी इतने कम बजट में नहीं कर पाते। शिक्षक बताते हैं कि सोफी जैसे AI रोबोट का निर्माण किसी भी छात्र के लिए एक असाधारण उपलब्धि है।
स्कूल प्रशासन ने भी आदित्य को सम्मानित किया है और उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।
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तकनीक की दुनिया में नई मिसाल
आदित्य का यह आविष्कार न केवल बुलंदशहर बल्कि पूरे राज्य में प्रेरणा का स्रोत बन चुका है। वह चाहता है कि ग्रामीण क्षेत्र के अधिक से अधिक बच्चे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोबोटिक्स को समझें और तकनीक की दुनिया में आगे बढ़ें।
कहने में कोई संकोच नहीं कि आदित्य कुमार ने कम उम्र में कर दिखाया यह काम आने वाले समय में भारत की शिक्षा प्रणाली के लिए नया रास्ता खोल सकता है।














