New Delhi: भारतीय मौसम विज्ञान एजेंसी इंडियामेटस्काई ने सोमवार देर रात एक महत्वपूर्ण अपडेट जारी किया, जिसमें बताया गया कि इंडोनेशिया के सक्रिय ज्वालामुखी से निकला ऐश प्लम अब ओमान-अरब सागर क्षेत्र होते हुए भारत की ओर बढ़ रहा है। यह राख का बादल मुख्य रूप से सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) गैस से भरा हुआ है, जबकि राख की मात्रा कम से मध्यम स्तर की है। इस प्लम का फैलाव मौसम मॉडल के आधार पर उत्तर और मध्य भारत तक पहुंच सकता है।
इंडियामेटस्काई के अनुसार, यह ऐश प्लम वायुमंडल के मध्य स्तर पर मौजूद है, इसलिए मैदानी इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) पर कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ेगा। एजेंसी ने स्पष्ट किया कि यह बादल जमीन की सतह तक नहीं पहुंच रहा, इसलिए दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और उत्तर प्रदेश जैसे बड़े मैदानी क्षेत्रों में ऐशफॉल की संभावना बेहद कम है। हालांकि कुछ इलाकों में SO2 का स्तर अस्थायी रूप से बढ़ सकता है।
तराई और हिमालयी क्षेत्रों पर ज्यादा असर
रिपोर्ट में बताया गया है कि यह प्लम हिमालय से टकराने के बाद SO2 गैस का कुछ हिस्सा नीचे उतर सकता है। इसकी वजह से नेपाल की पहाड़ियां, हिमालयी क्षेत्र और उत्तर प्रदेश का तराई बेल्ट जैसे गोरखपुर, बहराइच, लखीमपुर खीरी आदि प्रभावित हो सकते हैं। इन क्षेत्रों में संवेदनशील लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
इंडियामेटस्काई का कहना है कि यह असर सीमित और अस्थायी होगा। प्लम के आगे बढ़ने के बाद यह चीन की दिशा में निकल जाएगा और भारत में इसके प्रभाव कम होते जाएंगे।
दिल्ली-NCR में खतरा नहीं, मामूली असर संभव
दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में हवा की गुणवत्ता पहले से ही प्रदूषण के कारण दबाव में है, लेकिन ज्वालामुखी की राख का यह बादल AQI में कोई उल्लेखनीय बदलाव नहीं करेगा। सतह पर ऐशफॉल की संभावना लगभग शून्य है। कुछ बेहद हल्के पार्टिकल्स गिर सकते हैं, लेकिन यह मात्रा इतनी कम होगी कि स्वास्थ्य पर कोई गंभीर प्रभाव नहीं पड़ेगा।
हवाई यातायात प्रभावित हो सकता है
मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, ज्वालामुखी की राख ऊंचे वायुमंडलीय स्तर पर मौजूद होने के कारण हवाई मार्गों पर असर संभव है। कुछ अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर उड़ानें देरी से चल सकती हैं या वैकल्पिक मार्ग अपनाए जा सकते हैं। हालांकि अब तक किसी बड़े व्यवधान की सूचना नहीं है।
स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
चूंकि यह प्लम ऊपरी वायुमंडल में है, इसलिए मैदानी इलाकों में रहने वाले लोग आंखों में जलन, सांस लेने में दिक्कत या अन्य स्वास्थ्य समस्याएं महसूस नहीं करेंगे। पर्वतीय और तराई क्षेत्रों में रहने वाले अस्थमा और सीओपीडी मरीजों के लिए हल्की सावधानी की सलाह दी गई है, जैसे मास्क पहनना और बाहर कम समय बिताना।
भारत का नया 1000 किलो DRDO ग्लाइड बम हुआ टेस्ट, क्या पाकिस्तान की बढ़ेगी टेंशन?
एजेंसी का कहना है कि यह स्थिति कुछ दिनों तक बनी रह सकती है, लेकिन इसे किसी बड़े प्रदूषण संकट के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। प्रभावित क्षेत्रों में लोग नियमित मौसम अपडेट पर नजर रखें।














