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पाकिस्तान में बढ़ी आर्मी की पकड़, अब देश की कमान आसिम मुनीर के हाथों में

On: November 9, 2025 10:00 AM
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Asim Munir
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Islamabad: पाकिस्तान की सियासत एक बार फिर फौज के इशारों पर चलती दिख रही है। देश में एक नया प्रस्ताव लाया गया है, जिसके बाद आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर की ताकत प्रधानमंत्री से भी अधिक हो जाएगी। यह बदलाव पाकिस्तान की सत्ता व्यवस्था में अब तक का सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है। हालांकि इन शक्तियों के बावजूद कहा जा रहा है कि आसिम मुनीर के सामने कुछ ऐसे राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय दबाव हैं, जिनसे वह पूरी तरह मुक्त नहीं हो पा रहे।

पाकिस्तान में नया सत्ता समीकरण तैयार

सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान की संसद में जल्द ही एक संवैधानिक संशोधन लाया जा सकता है, जिससे सेना प्रमुख को उच्च न्यायपालिका, खुफिया एजेंसियों और यहां तक कि सरकारी नियुक्तियों में भी दखल का अधिकार मिल जाएगा।

इस संशोधन के बाद सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जजों की नियुक्ति प्रक्रिया में सेना की राय अहम मानी जाएगी। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि इससे पाकिस्तान में सेना का प्रभाव लगभग पूर्ण रूप से स्थापित हो जाएगा।

फील्ड मार्शल बनने के बाद बढ़ा दायरा

मई 2025 में जनरल आसिम मुनीर को “फील्ड मार्शल” की उपाधि दी गई थी, जो अब तक पाकिस्तान के किसी भी सेना प्रमुख को नहीं मिली थी। यह पद उन्हें न केवल फौजी शक्तियां देता है, बल्कि सिविल गवर्नेंस पर भी अप्रत्यक्ष नियंत्रण सुनिश्चित करता है।

इस उपाधि के साथ, आसिम मुनीर अब रक्षा, विदेश नीति और घरेलू सुरक्षा से जुड़े हर बड़े फैसले में प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं।

क्यों परेशान हैं आसिम मुनीर?

  • शक्तियां बढ़ने के बावजूद आसिम मुनीर कई चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
  • सबसे बड़ी चुनौती है पाकिस्तान की गिरती अर्थव्यवस्था और जनता का घटता भरोसा।
  • IMF के दबाव, बढ़ती महंगाई और राजनीतिक अस्थिरता ने सरकार और सेना दोनों की साख पर असर डाला है।
  • साथ ही, पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की लोकप्रियता और उनके समर्थकों का विरोध अभी भी सेना के लिए सिरदर्द बना हुआ है।
  • विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही आसिम मुनीर के पास “रिमोट कंट्रोल” है, लेकिन देश की आर्थिक और राजनीतिक अस्थिरता उनके लिए सबसे बड़ी चिंता है।

पाकिस्तान की लोकतंत्र पर उठे सवाल

  • इस प्रस्ताव के बाद पाकिस्तान के लोकतांत्रिक ढांचे पर भी सवाल उठने लगे हैं।
  • कई मानवाधिकार संगठनों ने इसे “लोकतंत्र पर सैन्य नियंत्रण” करार दिया है।
  • लोगों का कहना है कि जब सेना राजनीति में दखल देती है, तो देश कभी स्थिर नहीं रह पाता और यही पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ा खतरा बन सकता है।

Sapna Srivastava

सपना श्रीवास्तव को हिंदी पत्रकारिता में दो साल का अनुभव है। उन्होंने इंडिया न्यूज़ समेत कई प्रमुख मीडिया संस्थानों में काम किया है। वर्तमान में वह डाइनामाइट न्यूज़ और आज का आइना के लिए राष्ट्रीय, राजनीतिक, ब्रेकिंग, लाइफस्टाइल, खान-पान और फैशन जैसे विषयों पर लिखती हैं।

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