New Delhi: पिछले दो साल में एक ट्रेंड तेजी से बदला है। पहले लोग कर्ज लेने से डरते थे। बैंक का नाम सुनते ही घर के बड़े बोल देते थे कि चाहे जैसे गुज़ारा करो लेकिन कर्ज मत लेना। लेकिन अब तस्वीर उलटी है। RBI के आंकड़े कहते हैं कि देश में पर्सनल लोन की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी है और ये सिर्फ बड़े शहरों की कहानी नहीं बल्कि छोटे शहरों तक यह बदलाव साफ दिख रहा है।
क्यों पर्सनल लोन की लाइन में बढ़ रही भीड़
इस बदलाव की एक वजह है महंगाई और दूसरी वजह है अनिश्चितता। कोरोना के बाद की दुनिया में नौकरी छूटने का डर और अचानक आने वाले मेडिकल खर्च सबसे बड़ी वजह बने। पर्सनल लोन की सबसे बड़ी खासियत यही है कि इसमें न प्रॉपर्टी गिरवी रखनी पड़ती है और न भारी प्रोसेस होती है। बैंक आज 24 घंटे में लोन दे रहे हैं और कुछ फिनटेक कंपनियां तो केवल आधार और पैन देखकर मिनटों में पैसा ट्रांसफर कर रही हैं।
लोन सिर्फ कर्ज नहीं, कई के लिए दूसरा मौका
दिल्ली के फाइनेंशियल सलाहकार और Credgenics के CEO ऋषभ गोयल कहते हैं कि पर्सनल लोन को सिर्फ बोझ की तरह मत देखिए। सही तरह से इस्तेमाल हो तो यह लोगों को दोबारा खड़ा होने का मौका देता है। कई छोटे व्यापारी, स्टार्टअप फाउंडर और नौकरी गंवाने वाले लोग पर्सनल लोन की मदद से अपना रुटीन और बिजनेस वापस पटरी पर ला पाए हैं। लेकिन इसमें गलती की जगह नहीं होती क्योंकि एक EMI छूटने के बाद ब्याज और पेनल्टी काफी बढ़ जाती है।
कैसे पहचानें कि लोन लेना सही फैसला है या मुसीबत का दरवाज़ा
पर्सनल लोन लेने का फैसला उस वक्त सही माना जाता है जब उसका उद्देश्य साफ हो। जैसे किसी मेडिकल इमरजेंसी में पैसा चाहिए हो या किसी महंगे कर्ज को चुकाना हो जिसका ब्याज ज्यादा हो। लेकिन अगर लोन सिर्फ शौक पूरा करने या लाइफस्टाइल चमकाने के लिए लिया जा रहा है तो यह धीरे-धीरे तनाव, कर्ज और खराब क्रेडिट स्कोर में बदल सकता है।
क्या पर्सनल लोन आर्थिक हालात सुधार सकता है
सवाल बड़ा है और जवाब सीधा भी और मुश्किल भी। हां, पर्सनल लोन आर्थिक हालत सुधार सकता है लेकिन तभी जब उसकी EMI सैलरी के उस हिस्से में आए जो पहले से खर्च नहीं हो रहा हो। अगर EMI सैलरी पर बोझ बने तो यह मदद नहीं बोझ बन जाता है और फिर जिंदगी सिर्फ कैलेंडर नहीं EMI की तारीखों में बदल जाती है।














