जम्मू और कश्मीर में श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस (SMVDMC) में MBBS कोर्स को 6 जनवरी, 2026 से आधिकारिक तौर पर बंद कर दिया गया है। कॉलेज में कुल 50 MBBS सीटें थीं, लेकिन अब वहां मेडिकल शिक्षा नहीं दी जाएगी। इस फैसले से जम्मू और कश्मीर और बाकी देश भर के शैक्षिक, राजनीतिक और सामाजिक संगठनों के बीच ज़ोरदार बहस छिड़ गई है।
MBBS कोर्स बंद करने का आधिकारिक कारण क्या है?
नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के हालिया निरीक्षण में पता चला कि SMVDMC MBBS कोर्स के लिए ज़रूरी मानकों को पूरा नहीं कर रहा था। रिपोर्ट के अनुसार, कॉलेज में पर्याप्त फैकल्टी की कमी थी, इंफ्रास्ट्रक्चर में कमियां थीं, और वह कुछ अन्य तकनीकी मानकों का पालन करने में विफल रहा। इसके आधार पर, NMC ने MBBS कोर्स को बंद करने की सिफारिश की, जिसे बाद में मान लिया गया।
क्या राजनीतिक और सामाजिक दबाव भी एक कारण था?
हालांकि आधिकारिक कारण NMC की रिपोर्ट बताया गया है, लेकिन कुछ सूत्रों और सोशल मीडिया पर चर्चाओं में दावा किया गया है कि इस फैसले में राजनीतिक दबाव और कुछ संगठनों के विरोध की भी भूमिका थी। आरोप है कि 50 MBBS सीटों में से लगभग 42 सीटें मुस्लिम छात्रों ने भरी थीं, जिस पर कुछ हिंदू संगठनों ने आपत्ति जताई थी।
इन संगठनों ने विरोध क्यों किया?
कुछ संगठनों ने तर्क दिया कि माता वैष्णो देवी के नाम पर बने मेडिकल कॉलेज में हिंदू छात्रों की संख्या बहुत कम और मुस्लिम छात्रों की संख्या बहुत ज़्यादा होना अनुचित है। उन्होंने एडमिशन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाया और इसे धार्मिक संतुलन से जोड़ा। बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद और कुछ अन्य सामाजिक संगठनों ने इस मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन किया।
कोर्स बंद होने का जश्न क्यों मनाया गया?
MBBS कोर्स बंद होने के बाद, सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो वायरल हुए जिनमें लोग इसे “जीत” के रूप में मनाते हुए दिखे। उन्होंने कहा कि वे वैष्णो देवी के नाम पर बने संस्थान में मुस्लिम छात्रों की इतनी ज़्यादा संख्या को स्वीकार नहीं कर सकते। हालांकि, इस जश्न की भी कड़ी आलोचना हुई।
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जनता की राय क्या है?
इस मुद्दे पर जनता की राय बंटी हुई है। एक समूह इस फैसले की आलोचना कर रहा है, उनका कहना है कि भारत में पहले से ही मेडिकल सीटों की भारी कमी है, और 50 MBBS सीटों का खत्म होना छात्रों के भविष्य के लिए नुकसानदायक होगा। हालांकि, दूसरा समूह इस फैसले का समर्थन करता दिख रहा है, और इसे धार्मिक पहचान से जोड़ रहा है। कई लोगों ने यह भी बताया है कि छात्रों को उनकी NEET मेरिट स्कोर के आधार पर सीटें मिली थीं, न कि उनके धर्म के आधार पर।
SMVDMC में एडमिशन प्रोसेस क्या था?
इस कॉलेज में एडमिशन पूरी तरह से NEET मेरिट और जम्मू और कश्मीर बोर्ड ऑफ़ प्रोफेशनल एंट्रेंस एग्ज़ामिनेशंस (JKBOPEE) द्वारा आयोजित काउंसलिंग पर आधारित थे। 100 प्रतिशत सीटें विशेष रूप से जम्मू और कश्मीर के स्थानीय छात्रों के लिए आरक्षित थीं। चूंकि राज्य में मुस्लिम आबादी ज़्यादा है, इसलिए ज़्यादा मुस्लिम छात्रों का होना स्वाभाविक माना गया।
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बहस: शिक्षा बनाम राजनीति
SMVDMC से MBBS कोर्स हटाने से एक बार फिर यह सवाल उठा है कि क्या शिक्षा को धर्म और राजनीति से अलग रखा जाना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि मेडिसिन जैसे क्षेत्रों में फैसले सिर्फ़ क्वालिटी और संसाधनों के आधार पर होने चाहिए, न कि धार्मिक पहचान के आधार पर।







