New Delhi: अयोध्या राम मंदिर में मंगलवार का दिन इतिहास में दर्ज हो गया, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंदिर के शिखर पर पवित्र भगवा ध्वज फहराकर इसके निर्माण की पूर्णता का औपचारिक संकेत दिया। यह क्षण धार्मिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत भी इस ऐतिहासिक ध्वजारोहण के साक्षी बने।
प्रधानमंत्री सुबह मंदिर पहुंचे और सबसे पहले विशेष पूजा-अर्चना में हिस्सा लिया। वहां उन्होंने सप्त ऋषि मंदिर, शेषावतार मंदिर और अन्नपूर्णा मंदिर के दर्शन किए। इसके बाद वे गर्भगृह में जाकर रामलला के समक्ष पूजा-अर्चना की।
कैसा है राम मंदिर का विशेष भगवा ध्वज?
मंदिर पर फहराया गया यह पवित्र ध्वज एक समकोण त्रिकोणीय आकार में है और गेरुए रंग का है, जो परंपरा और त्याग का प्रतीक माना जाता है। इस ध्वज पर तीन विशेष प्रतीक अंकित हैं—
- सूर्य, जो भगवान राम की तेजस्विता और पराक्रम का प्रतिनिधित्व करता है
- ‘ॐ’, जो सनातन धर्म की मूल ध्वनि और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक है
- कोविदारा वृक्ष, जिसे पवित्रता और सांस्कृतिक निरंतरता से जोड़ा जाता है
- यह ध्वज राम राज्य के आदर्श मूल्यों एकता, मर्यादा, धर्म और सेवा का भी प्रतिनिधित्व करता है।
ध्वजारोहण से पहले हुई विशेष पूजा
प्रधानमंत्री मोदी के मंदिर पहुंचते ही पूरे परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार शुरू हो गए। उन्होंने पारंपरिक विधि से पूजा की और मंदिर के शिखर पर ध्वज फहराया। इस दौरान हजारों लोगों ने जय श्री राम के उद्घोष के साथ इस ऐतिहासिक पल का स्वागत किया।
अयोध्या में उत्सव का माहौल
ध्वजारोहण को देखने के लिए अयोध्या में भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे। पूरे शहर में भक्ति और उत्सव का वातावरण था। मंदिर परिसर को विशेष रूप से सजाया गया था और सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए।
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राम मंदिर निर्माण का प्रतीकात्मक पूर्णता समारोह
भगवा ध्वज का फहराया जाना केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि राम मंदिर निर्माण के पूर्ण होने का सांस्कृतिक संकेत भी माना जा रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह क्षण भारत की आध्यात्मिक आत्मा और सांस्कृतिक धरोहर का सम्मान है।








