New Delhi: देश में प्रदूषण कम करने और स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने के लिए सरकार लगातार इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहित कर रही है। सब्सिडी दी जा रही है, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जा रहा है और कंपनियां भी नए EV मॉडल लॉन्च कर रही हैं। इसके बावजूद, EV की बिक्री पेट्रोल और डीजल वाहनों के मुकाबले अभी भी काफी पीछे है।
EnviroCatalysts की नई रिपोर्ट बताती है कि दोपहिया, चारपहिया, बस और तीनपहिया सेगमेंट में EV की रजिस्ट्री निश्चित रूप से बढ़ रही है, लेकिन यह बढ़त अभी भी पेट्रोल-डीजल वाहनों की तुलना में बेहद धीमी है।
पेट्रोल वाहनों की तुलना में EV रजिस्ट्रेशन बेहद कम
रिपोर्ट के मुताबिक जनवरी से सितंबर 2024 के बीच 2.7 लाख पेट्रोल दोपहिया रजिस्टर हुए, जबकि इलेक्ट्रिक दोपहिया की संख्या सिर्फ 26,613 रही। 2025 में यह अंतर और बढ़ गया, जहां पेट्रोल टू-व्हीलर रजिस्ट्रेशन 3.2 लाख तक पहुंच गया, लेकिन ईवी दोपहिया केवल 27,028 यूनिट ही दर्ज हुए।
चारपहिया सेगमेंट में भी स्थिति अलग नहीं है। पेट्रोल कारें बिक्री में सबसे आगे रहीं, जबकि इलेक्ट्रिक फोर-व्हीलर रजिस्ट्रेशन 3848 से बढ़कर भी सिर्फ 9905 तक ही पहुंच सका। पर्यटक श्रेणी की इलेक्ट्रिक कारों की स्थिति और कमजोर दिखी, जहां 2024 में 1748 रजिस्ट्रेशन हुए थे, लेकिन 2025 में सितंबर तक सिर्फ 466 दर्ज किए गए। यह पूरा ट्रेंड दिखाता है कि ईवी बाजार जरूर बढ़ रहा है, लेकिन इसकी गति अभी भी बहुत धीमी है और यह मुख्यधारा में तेजी से प्रवेश करने में संघर्ष कर रहा है।
थ्री-व्हीलर और ई-बस सेगमेंट में हल्की बढ़त
थ्री-व्हीलर इलेक्ट्रिक वाहनों की रजिस्ट्रेशन में बढ़त जरूर दर्ज की गई है, जहां 2024 में 8,379 ईवी थ्री-व्हीलर रजिस्टर हुए थे, वही संख्या 2025 में बढ़कर 11,331 हो गई। इसके बावजूद यात्री ई-ऑटो की रजिस्ट्रेशन में गिरावट देखी गई है। इसी तरह ई-बसों की संख्या में मामूली बढ़ोतरी हुई है, लेकिन डीजल बसों की मजबूत बिक्री के चलते इलेक्ट्रिक बसों की ग्रोथ उतनी प्रभावशाली नहीं दिखती।
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EV बिक्री धीमी क्यों?
1. महंगे स्पेयर पार्ट्स और ऊंची मेंटेनेंस लागत
- ई-ऑटो और कई EV मॉडलों में कंट्रोलर, मोटर और बैटरी की कीमतें काफी ज्यादा होती हैं।
- कई बार एक ही पार्ट की कीमत 1 लाख रुपये से अधिक तक पहुंच जाती है।
- यह खर्च आम वाहन मालिक या ऑटो ड्राइवर के लिए बहुत भारी पड़ता है।
- इसके मुकाबले CNG वाहनों की मेंटेनेंस लागत काफी कम है, जिससे ग्राहक EV की बजाय CNG मॉडल चुनते हैं।
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2. चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और स्थिर नीतियों की कमी
EnviroCatalysts के विश्लेषक सुनील दहिया के अनुसार, भारत में EV बिक्री तभी तेज होगी जब:
- चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत हो
- नीतियां स्थिर और स्पष्ट हों
- सब्सिडी सिस्टम में बार-बार बदलाव न हों
अभी भी कई शहरों में चार्जिंग स्टेशन बेहद कम हैं। साथ ही, सरकारी नीतियों में बदलाव ग्राहकों को भ्रमित करता है, जिससे खरीद का निर्णय टल जाता है।














