New Delhi: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजे सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में एक बार फिर उद्योगपति गौतम अडानी का नाम चर्चा में है। NDA को मिली 202 सीटों की ऐतिहासिक जीत ने न सिर्फ राज्य की राजनीति की दिशा बदल दी, बल्कि भारतीय शेयर बाजार और उद्योग जगत में भी बड़ा असर देखने को मिला।
चुनाव अभियान के दौरान एक समय ऐसा आया जब अडानी का नाम सबसे ज्यादा सुर्खियों में रहा। विपक्ष ने आरोप लगाया कि राज्य की नीतीश सरकार ने भागलपुर के पीरपैंती क्षेत्र में अडानी पावर लिमिटेड को 1050 एकड़ जमीन बेहद कम कीमत पर प्रदान की है, ताकि कंपनी वहां 2400 मेगावॉट का थर्मल पावर प्लांट स्थापित कर सके। विपक्ष का दावा था कि यह जमीन 25 साल के लीज पर मात्र एक रुपये टोकन अमाउंट पर दी गई, जिसके पीछे बड़े आर्थिक फायदे छिपे हैं।
सरकार और बीजेपी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जमीन का आवंटन कानूनी प्रक्रिया और औद्योगिक नीति के तहत किया गया है। सरकार का कहना था कि यह परियोजना पूरे इलाके में रोजगार, बिजली उत्पादन और औद्योगिक विकास को गति देगी। लेकिन चुनावी माहौल में यह मुद्दा काफी गर्मा गया था।
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नतीजे आते ही अडानी ग्रुप के शेयरों में जोरदार उछाल
जब चुनाव नतीजों के शुरुआती रुझान NDA के पक्ष में दिखने लगे, भारतीय शेयर बाजार में तेजी आनी शुरू हो गई।
अडानी समूह की कंपनियों के शेयरों ने विशेष रूप से मजबूत प्रदर्शन किया।
अडानी एंटरप्राइजेज लगभग 5% तक उछला
अडानी पोर्ट्स, अडानी पावर, अडानी ग्रीन समेत कई स्टॉक्स में लगातार तेजी
इसी तेजी के कारण गौतम अडानी की नेटवर्थ में 684 मिलियन डॉलर (6066 करोड़ रुपये से अधिक) का इजाफा हुआ।
अडानी पहुंचे दुनिया के टॉप रिच लिस्ट में
ब्लूमबर्ग बिलियनेयर इंडेक्स के अनुसार:
गौतम अडानी की नेटवर्थ अब 91.6 अरब डॉलर
वैश्विक अमीरों की लिस्ट में 19वां स्थान
इस साल ही उनकी संपत्ति में 12.9 अरब डॉलर का इजाफा हुआ है।
अडानी ग्रुप का बिजनेस पोर्ट, बिजली, हवाई अड्डे, लॉजिस्टिक्स, इंफ्रास्ट्रक्चर से बढ़कर अब बैटरी स्टोरेज और ग्रीन एनर्जी तक फैल चुका है। बढ़ते पोर्टफोलियो और मजबूत पॉलिसी सपोर्ट की वजह से बाजार में उनका प्रदर्शन लगातार बेहतर होता जा रहा है।
चुनाव, राजनीति और बाजार तीनों क्यों जुड़े?
विशेषज्ञों के अनुसार भारत में बड़े चुनावों का सीधा असर बाजार पर पड़ता है।
स्थिर सरकार बनना, नीतियों का स्पष्ट रोडमैप और बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट्स को समर्थन इन तीनों वजहों से उद्योगपतियों की कंपनियों को बढ़त मिलती है।
बिहार चुनाव से पहले अडानी के नाम को विपक्ष ने चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश की, लेकिन नतीजे पूरी तरह विपरीत आए। अब चुनाव परिणाम से बाजार में स्थिरता बढ़ी है और इसका सीधा लाभ अडानी समूह समेत कई बड़ी कंपनियों को मिला है।
बड़ी बात
बिहार का यह चुनाव सिर्फ राजनीतिक नहीं था, बल्कि आर्थिक और औद्योगिक संकेतक भी साबित हुआ है।
नतीजों के बाद बाजार में जो रुझान आया है, वह यह साफ बताता है कि नीति स्थिरता और सरकार की मजबूती से उद्योग जगत को बड़ा फायदा मिलता है।















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