New Delhi: अयोध्या के रामलला मंदिर में आज का दिन बेहद ऐतिहासिक है। विवाह पंचमी के पावन अवसर पर मंदिर के शिखर पर केसरिया ध्वज का विधिवत आरोहण किया जा रहा है। यही वह तिथि मानी जाती है जब त्रेतायुग में भगवान श्रीराम और माता सीता का विवाह हुआ था। इस विशेष अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं रामलला मंदिर के शिखर पर ध्वज फहराएंगे। यह कार्यक्रम मंदिर निर्माण के पूर्ण होने और उसकी नई शुरुआत का प्रतीक माना जा रहा है।
मंदिर निर्माण पूर्ण होने के बाद अब राम मंदिर की नियमित पूजा-पद्धति सुचारू रूप से चल रही है। इसी बीच लोगों के बीच एक सवाल काफी चर्चा में है कि राम मंदिर में पुजारी कैसे नियुक्त किए जाते हैं और उन्हें कितना वेतन मिलता है।
कैसे बनते हैं राम मंदिर के पुजारी?
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट मंदिर में पुजारियों की नियुक्ति की जिम्मेदारी संभालता है। पुजारी बनने के लिए उम्मीदवार का संस्कृत, वेद, शास्त्र और संपूर्ण पूजा विधि का गहरा ज्ञान होना अनिवार्य है। अधिकतर पुजारी आचार्य या शास्त्री स्तर की शिक्षा प्राप्त करते हैं। बड़े मंदिरों में पूजा का अनुभव, शांत स्वभाव, अनुशासित जीवनशैली और धार्मिक आचरण को भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
इच्छुक उम्मीदवारों का इंटरव्यू लिया जाता है और पूजा विधि का प्रैक्टिकल टेस्ट भी आयोजित किया जाता है। इन सभी चरणों के बाद ही पुजारी का अंतिम चयन किया जाता है। इससे सुनिश्चित होता है कि मंदिर में नियुक्त होने वाले पुजारी पारंपरिक नियमों का सही पालन कर सकें।
कितनी होती है राम मंदिर के पुजारियों की सैलरी?
रिपोर्ट्स के अनुसार, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने हाल ही में पुजारियों और मंदिर कर्मचारियों की सैलरी में बढ़ोतरी की है। इससे न सिर्फ मंदिर में सेवा देने वालों को आर्थिक मजबूती मिली है बल्कि उनके सामाजिक जीवन में भी सुधार हुआ है।
प्रधान पुजारी का वेतन: लगभग ₹35,000 प्रति माह
सहायक पुजारी का वेतन: लगभग ₹33,000 प्रति माह
भंडारी और कोठारी का वेतन: लगभग ₹24,000 प्रति माह
नए भंडारी पद पर नियुक्ति: ₹19,000 प्रति माह
ट्रस्ट ने यह भी सुनिश्चित किया है कि मंदिर प्रशासन की सुचारू व्यवस्था बनाए रखने के लिए कर्मचारियों के वेतन का एक हिस्सा फंड के रूप में काटा जाएगा। साथ ही सालाना वेतन वृद्धि की प्रक्रिया भी लागू की गई है, जिससे भविष्य में पुजारियों और स्टाफ के वेतन में नियमित बढ़ोतरी होती रहेगी।
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अयोध्या में उत्सव का माहौल
विवाह पंचमी के इस पवित्र दिन पर अयोध्या में उत्सव जैसा माहौल है। मंदिर परिसर को सजाया गया है और श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या इस खास क्षण का हिस्सा बनने के लिए पहुंच रही है। शिखर पर केसरिया ध्वज का आरोहण न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि सांस्कृतिक रूप से भी एक महत्वपूर्ण क्षण माना जा रहा है।








