New Delhi: हर साल 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला क्रिसमस आज सिर्फ एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में मनाया जाने वाला सांस्कृतिक और सामाजिक उत्सव बन चुका है। ईसाई धर्म के लोग इसे ईसा मसीह के जन्मदिन के रूप में मनाते हैं, जिनकी शिक्षाएं ईसाई धर्म की नींव हैं। समय के साथ क्रिसमस से जुड़ी परंपराएं धार्मिक दायरे से निकलकर वैश्विक संस्कृति का हिस्सा बन गईं, जिनमें गिफ्ट देना, क्रिसमस ट्री सजाना, चर्च जाना, परिवार के साथ भोजन करना और सांता क्लॉज का इंतजार करना शामिल है।
क्रिसमस की शुरुआत कैसे हुई?
ईसा मसीह के जन्म से कई सदियों पहले भी दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में सर्दियों के बीच त्योहार मनाने की परंपरा थी। यूरोप में लोग शीतकालीन संक्रांति (Winter Solstice) के दौरान रोशनी और नए जीवन का उत्सव मनाते थे। यह वह समय होता था जब सबसे लंबी रात के बाद दिन धीरे-धीरे बड़े होने लगते थे।
स्कैंडिनेविया में नॉर्स समुदाय ‘यूल’ नामक पर्व मनाता था, जो दिसंबर 21 के आसपास शुरू होकर कई दिनों तक चलता था। इस दौरान बड़े लकड़ी के लठ्ठों को जलाया जाता था और दावतें होती थीं। लोगों का मानना था कि आग से निकलने वाली हर चिंगारी आने वाले साल में नए जीवन का संकेत देती है।
सैटर्नालिया से क्रिसमस तक
रोमन साम्राज्य में सैटर्नालिया नाम का त्योहार मनाया जाता था, जो कृषि के देवता सैटर्न को समर्पित था। यह उत्सव दिसंबर के आखिरी हफ्तों में मनाया जाता था, जिसमें सामाजिक नियमों को अस्थायी रूप से उलट दिया जाता था। दासों को आज़ादी मिलती थी, स्कूल और व्यापार बंद रहते थे और हर तरफ उत्सव का माहौल होता था।
इसी दौरान 25 दिसंबर को सूर्य देव ‘मिथ्रा’ का जन्मदिन भी मनाया जाता था। माना जाता है कि चौथी शताब्दी में चर्च ने इन लोकप्रिय परंपराओं को अपनाते हुए ईसा मसीह के जन्मोत्सव के लिए 25 दिसंबर की तारीख तय की, ताकि लोग इस नए धार्मिक पर्व को आसानी से स्वीकार कर सकें।
क्या सच में 25 दिसंबर को हुआ था ईसा मसीह का जन्म?
बाइबल में ईसा मसीह के जन्म की सटीक तारीख का उल्लेख नहीं मिलता। कुछ इतिहासकारों का मानना है कि उनका जन्म वसंत ऋतु में हुआ होगा। बावजूद इसके, पोप जूलियस प्रथम ने 25 दिसंबर को आधिकारिक तौर पर ईसा मसीह के जन्मदिन के रूप में स्वीकार किया। वर्ष 336 ईस्वी में पहली बार इस दिन को क्रिसमस के रूप में मनाए जाने का उल्लेख मिलता है।
जब क्रिसमस पर लगी थी रोक
इतिहास में एक समय ऐसा भी आया जब क्रिसमस को प्रतिबंधित कर दिया गया था। 17वीं शताब्दी में इंग्लैंड में ओलिवर क्रॉमवेल और उनके प्यूरिटन समर्थकों ने इसे “फिजूलखर्ची और दिखावे” का पर्व बताकर रद्द कर दिया। अमेरिका के बोस्टन में भी 1659 से 1681 तक क्रिसमस मनाना गैरकानूनी था और उल्लंघन पर जुर्माना लगता था।
अमेरिकी स्वतंत्रता के बाद भी लंबे समय तक क्रिसमस को आधिकारिक मान्यता नहीं मिली। आखिरकार 26 जून 1870 को इसे अमेरिका में संघीय अवकाश घोषित किया गया।
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आज का क्रिसमस
आज क्रिसमस आस्था, प्रेम, भाईचारे और खुशियों का प्रतीक बन चुका है। धार्मिक प्रार्थनाओं के साथ-साथ यह त्योहार लोगों को एक-दूसरे के करीब लाने का माध्यम भी बन गया है, यही वजह है कि यह दुनिया के सबसे लोकप्रिय त्योहारों में गिना जाता है।








