New Delhi: आनंद एल राय की नई फिल्म ‘तेरे इश्क में’ रिलीज के बाद से सोशल मीडिया पर चर्चा में है। दर्शकों का एक बड़ा वर्ग इसे कबीर सिंह, रांझणा, धड़कन और ऐ दिल है मुश्किल के मिश्रण जैसा बता रहा है। कई सिनेप्रेमियों का कहना है कि फिल्म मानो अलग-अलग फिल्मों की स्क्रिप्ट से कुछ पन्ने उठाकर जोड़ दी गई हो।
फिल्म को हिमांशु शर्मा और नीरज यादव ने लिखा है। कहानी की शुरुआत होती है लद्दाख में, जहां एयर फोर्स ऑफिसर शंकर (धनुष) अपने गुस्सैल स्वभाव और इंस्टिंक्ट्स के चलते एक निजी युद्ध लड़ रहा है। यूनिट उसे मानसिक काउंसलिंग की सलाह देती है और यहां एंट्री होती है कृति सैनन की जो गर्भवती, तनावग्रस्त, नींद की गोलियां खाती और प्रोफेशनल ड्यूटी पर कायम नजर आती हैं।
फ्लैशबैक में खुलती है प्रेम और जुनून की कहानी
फिल्म सात साल पीछे जाती है, जहां कृति ‘मुक्ति’ के रूप में एक साइकोलॉजी स्टूडेंट हैं। वह मानती हैं कि हिंसा इंसान के लिए किसी बेकार एपेंडिक्स की तरह है, जिसे प्यार और सहानुभूति से खत्म किया जा सकता है।
इसी दौरान वह शंकर को कॉलेज में लड़ाई करते देखती हैं और उसे अपने रिसर्च का परफेक्ट सब्जेक्ट मान लेती हैं। उधर शंकर पहली नज़र में ही उसके प्यार में पड़ जाता है और यहीं से कहानी जुनून की तरफ मुड़ जाती है।
लेकिन जहां फिल्म हिंसा, बचपन के आघात, वर्ग भेद और पर्सनैलिटी डिसऑर्डर जैसे मुद्दों को विस्तार से पेश कर सकती थी, वहां इन्हें बस छूकर आगे बढ़ जाती है।
मुक्ति और शंकर का संबंध इतना अजीब तरीके से लिखा गया है कि दर्शक उनकी भावनाओं से जुड़ ही नहीं पाते। वह उसका ‘टॉक्सिक’ व्यवहार सुधारने की कोशिश करती हैं, और जब वह उसके लिए असंभव सा काम कर देता है, तब तक वह आगे बढ़ चुकी होती हैं। इस मोड़ के बाद फिल्म का ड्रामा और उग्र हो जाता है।
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कहानी में लॉजिक की कमी
- कई जगह फिल्म कमजोर होती है
- 26-27 साल का व्यक्ति एयर फोर्स एग्जाम देता दिखता है, जबकि उम्र सीमा इससे कम है।
- कृति का किरदार तीन साल में PhD और फिर पोस्ट-ग्रैजुएशन करता दिखाया गया है।
- सिक्योरिटी गार्ड्स कहानी की जरूरत के हिसाब से आते-जाते रहते हैं।
फिल्म का लगभग तीन घंटे का रनटाइम भी इसे बोझिल बनाता है। 12th Fail-स्टाइल UPSC ट्रैक भी कहानी में फिट नहीं बैठता। एआर रहमान का संगीत उम्मीदों पर खरा नहीं उतरता, सिर्फ दो गाने ही असर छोड़ते हैं।
परफॉर्मेंस मजबूत, लेकिन कहानी कमज़ोर
धनुष हमेशा की तरह हर फ्रेम में जान डाल देते हैं। उनका दर्द और आक्रोश दोनों प्रभावी है। कृति भी शानदार काम करती हैं, खासकर शांत पलों में। प्रकाश राज फिल्म की जान हैं, और जब भी उनके साथ कुछ गलत होता है, दर्शक महसूस करते हैं। मोहम्मद जीशान अय्यूब की एंट्री रांझणा की याद दिलाती है। हालांकि बाकी कलाकारों की क्षमता का पूरा उपयोग नहीं किया गया।
टॉक्सिक लव का रोमांटीकरण फिर वही गलती
फिल्म उन दर्शकों को रास आएगी जो तीखे ड्रामा, भावनाओं के विस्फोट और जुनून भरी कहानियों के प्रशंसक हैं। लेकिन नैतिक, भावनात्मक और थीमैटिक स्तर पर यह फिल्म गिरती है।2025 में भी ऐसी कहानियों को देखना निराश करता है, जो खतरनाक रिश्तों और अस्वस्थ प्रेम को ग्लोरिफाई करती हैं।














