New Delhi: भारत के नए मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने सोमवार को राष्ट्रपति भवन में देश के 53वें CJI के रूप में शपथ ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें संक्षिप्त लेकिन महत्वपूर्ण समारोह में पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। उन्होंने ईश्वर के नाम पर हिंदी में शपथ ली, और इस तरह अपने लगभग 15 महीने के कार्यकाल की औपचारिक शुरुआत की।
जस्टिस सूर्यकांत का कार्यकाल फरवरी 9, 2027 तक रहेगा, जब वे 65 वर्ष की आयु प्राप्त करेंगे।
पूर्व CJI बीआर गवई का अनोखा कदम
कार्यक्रम के दौरान एक दिलचस्प और मिसाल-स्थापित करने वाला दृश्य देखने को मिला। 23 नवंबर को रिटायर हुए पूर्व CJI बीआर गवई शपथ समारोह में निर्धारित सरकारी Mercedes-Benz कार से पहुंचे, लेकिन कार्यक्रम समाप्त होने के बाद वे उसी कार से वापस नहीं गए।
PTI के अनुसार, उन्होंने सरकारी कार वहीं नए CJI सूर्यकांत के उपयोग के लिए छोड़ दी और स्वयं अपने निजी वाहन से निवास के लिए रवाना हो गए।
यह कदम नई परंपरा स्थापित करता है और न्यायपालिका में गरिमा व संवैधानिक सम्मान को दर्शाता है।
समारोह में कई गणमान्य हस्तियां उपस्थित
शपथ समारोह में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पूर्व CJI गवई और केंद्रीय मंत्री मौजूद थे। समारोह के बाद जस्टिस सूर्यकांत ने अपने बड़े परिजनों के पैर छूकर आशीर्वाद लिया, जिसने इस मौके को भावुक और पारंपरिक स्पर्श दिया।
Attended the oath taking ceremony of Justice Surya Kant as the Chief Justice of India. Best wishes to him for his tenure ahead. pic.twitter.com/62yeSlfmsx
— Narendra Modi (@narendramodi) November 24, 2025
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने X पर लिखा, “जस्टिस सूर्यकांत को भारत के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ लेने पर बधाई। उनके सफल कार्यकाल की शुभकामनाएं।”
कई देशों के मुख्य न्यायाधीश हुए शामिल
कार्यक्रम में विश्व के कई देशों की न्यायपालिका से आए वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। इनमें शामिल थे:
- भूटान के चीफ जस्टिस ल्योनपो नोरबू त्शेरिंग
- केन्या की चीफ जस्टिस मार्था कूमे
- मलेशिया की जस्टिस टन श्री दातुक नलिनी पाठमनाथन
- मॉरीशस की चीफ जस्टिस बीबी रेहाना मुंगली-गुलबुल
- नेपाल के चीफ जस्टिस प्रकाश मान सिंह राउत
- श्रीलंका के चीफ जस्टिस पी पद्मन सुरेसेना
उनकी मौजूदगी ने इस कार्यक्रम को अंतरराष्ट्रीय महत्व दिया।
जस्टिस सूर्यकांत का सफर
10 फरवरी 1962 को हरियाणा के हिसार में जन्मे जस्टिस सूर्यकांत ने एक छोटे शहर में वकालत शुरू की और कड़ी मेहनत तथा उत्कृष्ट फैसलों के दम पर देश की सर्वोच्च न्यायिक कुर्सी तक पहुंचे।
उनका करियर शामिल करता है:
- पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में महत्वपूर्ण फैसले
- हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्य
- सुप्रीम कोर्ट में कई ऐतिहासिक बेंचों का हिस्सा
उनकी ईमानदार, व्यावहारिक और संवैधानिक दृष्टि ने उन्हें न्यायपालिका का एक मजबूत स्तंभ बनाया है।









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