Illegal Coal Mining: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अवैध कोयला खनन और तस्करी के एक बड़े मामले में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2002 (PMLA) के तहत जांच शुरू की है। यह कार्रवाई 2020 में दर्ज एक FIR पर आधारित है। जांच में पता चला कि ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) के लीज एरिया से बड़े पैमाने पर अवैध कोयला खनन और चोरी हो रही थी।
सरकारी विभागों की मिलीभगत के आरोप
ED की जांच में पता चला कि यह अवैध गतिविधि सिर्फ़ आपराधिक गिरोहों तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसमें ECL, CISF, भारतीय रेलवे और अन्य संबंधित विभागों के कुछ अधिकारियों की कथित मिलीभगत भी शामिल थी। कोयले का खनन, परिवहन और बिक्री एक संगठित सिंडिकेट के ज़रिए किया जा रहा था।
अनूप माझी मास्टरमाइंड के रूप में पहचाना गया
जांच एजेंसी के अनुसार, अनूप माझी इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड था। वह सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत से ECL लीज एरिया से अवैध रूप से कोयला निकाल रहा था, उसका परिवहन कर रहा था और बेच रहा था। ED की रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ कि 2000 से 2015 के बीच अनूप माझी के खिलाफ अवैध कोयला खनन और चोरी से जुड़े 16 मामले दर्ज किए गए थे, और इन मामलों में चार्जशीट भी दायर की गई थी। इसके बावजूद, प्रभाव और संरक्षण के कारण लंबे समय तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
CBI केस से जांच में तेज़ी आई
हालांकि, 2020 में, केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने कोयला चोरी और तस्करी से संबंधित एक नया मामला दर्ज किया। इसके बाद, ED ने भी PMLA के तहत अपनी जांच शुरू की। जांच में पता चला कि अनूप माझी ने चोरी किए गए कोयले पर नज़र रखने के लिए विभिन्न कंपनियों और जगहों पर कर्मचारी तैनात किए थे।
₹2,742 करोड़ से ज़्यादा का गबन
ED के अनुसार, ECL लीज एरिया से अवैध खनन और चोरी के ज़रिए लगभग ₹2,742.32 करोड़ (टैक्स और रॉयल्टी सहित) के कोयले का गबन किया गया। इसे अब तक सामने आए अवैध कोयला खनन मामलों में शामिल सबसे बड़ी रकम में से एक माना जाता है।
46 जगहों पर छापे
जनवरी और अप्रैल 2021 के बीच, ED ने PMLA की धारा 17 के तहत 46 जगहों पर तलाशी और ज़ब्ती अभियान चलाया। छापों के दौरान यह भी पता चला कि अनूप माझी का अकाउंटेंट अवैध कोयला खनन से कमाए गए अपराध की कमाई का पूरा रिकॉर्ड रखता था।
अपराध से मिले पैसे के ट्रांसफर का भी खुलासा हुआ
जांच में यह भी पता चला कि गुरुपदा माझी ने 2017 और 2020 के बीच अनूप माझी के साथियों के ज़रिए अपराध से मिले 89.11 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए थे। जयदेव मंडल ने इसी दौरान अपराध से मिले 58.05 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए। ED का कहना है कि जांच जारी है और आने वाले दिनों में और भी अहम खुलासे होने की उम्मीद है।








