Share Market: पिछले हफ़्ते भारतीय शेयर बाज़ार में गिरावट का दौर जारी रहा और इसका असर देश की बड़ी कंपनियों पर साफ़ दिख रहा है। प्रॉफ़िट-बुकिंग, आकर्षक बिकवाली के मौकों और कुछ चुनिंदा शेयरों में वैल्यू कम होने की वजह से देश की टॉप 10 सबसे वैल्यूएबल कंपनियों में से सात की कुल मार्केट कैपिटलाइज़ेशन में लगभग 35,439 करोड़ रुपये की बड़ी गिरावट आई।
हालांकि कंपनी के शेयर हफ़्ते के आखिर में 112.09 अंक या 0.13 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुए, लेकिन यह इन बड़ी कंपनियों के नुकसान की भरपाई के लिए काफ़ी नहीं था। बाज़ार के जानकारों का कहना है कि ग्लोबल अनिश्चितता और आने वाले बेंचमार्क डेटा की वजह से निवेशक रिस्क लेने से बच रहे हैं।
SBI को सबसे बड़ा झटका लगा
इस गिरावट का सबसे बड़ा असर स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया (SBI) पर देखा गया। देश के सबसे बड़े पब्लिक सेक्टर बैंक की मार्केट वैल्यू में लगभग 12,000 करोड़ रुपये की गिरावट आई। इसके बाद SBI का कुल मार्केट कैपिटलाइज़ेशन 8,92,046.88 करोड़ रुपये हो गया। इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में दबाव और कुछ खास शेयरों में प्रॉफ़िट-बुकिंग का भारी असर पड़ रहा है।
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इन दूसरी बड़ी कंपनियों को भी नुकसान हुआ
सिर्फ़ SBI ही नहीं, इस हफ़्ते कई दूसरी बड़ी कंपनियों को भी नुकसान हुआ।
- रिलायंस इंडस्ट्रीज़ की मार्केट वैल्यू 8,254.81 करोड़ रुपये घटकर 21,09,712.48 करोड़ रुपये हो गई।
- बजाज फ़ाइनेंस का मार्केट कैपिटलाइज़ेशन 5,102.43 करोड़ रुपये घटकर 6,22,124.01 करोड़ रुपये हो गया।
- लार्सन एंड टुब्रो (L&T) का वैल्यूएशन 4,002.94 करोड़ रुपये घटकर 5,56,436.22 करोड़ रुपये हो गया।
- ICICI बैंक का मार्केट कैपिटलाइज़ेशन 2,571.39 करोड़ रुपये कम हो गया। भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) को ₹1,802.62 करोड़ का नुकसान हुआ, जिससे इसका वैल्यूएशन घटकर ₹5,37,403.43 करोड़ हो गया।
- टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज़ (TCS) की मार्केट वैल्यू में ₹1,013.07 करोड़ की गिरावट आई, जिससे इसका मार्केट कैपिटलाइज़ेशन ₹11,86,660.34 करोड़ हो गया।
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इन ऑफिसों में दुकानें खुलती दिखीं।
जहां ज़्यादातर ब्लू-चिप स्टॉक दबाव में थे, वहीं कुछ कंपनियों ने बाज़ार को सहारा देने की कोशिश की। इस दौरान, HDFC बैंक, इंफोसिस और भारती एयरटेल के मार्केट कैपिटलाइज़ेशन में बढ़ोतरी देखी गई। इन शेयरों में खरीदारी से बाज़ार की गिरावट कुछ हद तक कम हुई।
आगे बाज़ार की दिशा क्या होगी?
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में ग्लोबल निवेशकों की गतिविधियां, डॉलर की मज़बूती, कच्चे तेल की संभावनाएँ और विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां बाज़ार की दिशा तय करेंगी। नए साल से पहले, निवेशक सतर्क निवेश रणनीति अपना सकते हैं, जिससे बाज़ार में सीमित भागीदारी होगी।













