New Delhi: अभी संसद का शीतकालीन सत्र चल रहा है। 8 दिसंबर, 2025 को वंदे मातरम् की 150वीं सालगिरह पर हुई चर्चा ने पूरे संसदीय माहौल को गरमा दिया है और एक नई राजनीतिक बहस को जन्म दिया है। 8 दिसंबर, 2025 को संसद में 10 घंटे की चर्चा ने एक बार फिर सत्ताधारी पार्टी और विपक्ष को आमने-सामने ला दिया है। प्रधानमंत्री मोदी ने वंदे मातरम् पर अपनी टिप्पणी में बताया कि 1937 में, वंदे मातरम् गाने के चार छंदों को सार्वजनिक रूप से हटाया गया। अब इस बात को लेकर सत्ताधारी पार्टी और विपक्ष में बहस छिड़ गई है।
क्यों हटाए गए थे वंदे मातरम के पद?
1875 में बंकिम चंद्र चटर्जी ने वंदे मातरम की रचना छह छंदों के साथ की थी, जिसे 1882 में उनके प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंदमठ’ में शामिल किया गया। धीरे-धीरे समय के साथ यह गीत भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का प्रमुख प्रतीक बन गया लेकिन 1930 के दशक में जब इसे राष्ट्रीय गीत बनाने की चर्चा चली तो उस समय मुस्लिम लीग के नेताओं ने इसके कुछ हिस्सों पर आपत्ति जताई।
उन्होंने तर्क दिया कि गीत में देवी दुर्गा की उपासना का भाव है और उन्होंने तर्क दिया कि हम मातृभूमि की वंदना कर सकते हैं, लेकिन देवी की पूजा वाला भाग धार्मिक रूप है जिसे इस्लामिक मान्यताओं के विरुद्ध माना गया। मुस्लिम लीग ने कहा कि ‘हम देश विरोधी नहीं, लेकिन अल्लाह के अलावा किसी की पूजा नहीं कर सकते।’
प्रचलित विवाद को नियंत्रित करने और पार्टी में सामंजस्य बिठाने के लिए कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने 1937 में निर्णय लिया कि सार्वजनिक कार्यक्रमों में केवल पहले दो पद ही गाए जाएंगे। यही दो पद आज भी राष्ट्रीय गीत के रूप में उपयोग किए जाते हैं।
पीएम मोदी का विपक्ष पर आरोप
पीएम मोदी ने संसद कि चर्चा में कहा कि वंदे मातरम सिर्फ गीत नहीं, स्वतंत्रता संघर्ष की ऊर्जा और संकल्प का स्रोत है। साथ ही उन्होंने 1937 के फैसले को “दुर्भाग्यपूर्ण” बताया और कहा कि इससे गीत की आत्मा का एक हिस्सा काट दिया गया।
पीएम मोदी ने दावा किया कि यह कदम मुस्लिम लीग के दबाव में उठाया गया, जिससे राष्ट्र की एकता को चोट पहुँची। साथ ही उन्होंने वंदे मातरम् कि पुनर्स्थापना का सुझाव दिया और कहा कि इसे देश की आत्मा और पहचान के रूप में देखा जाना चाहिए।
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भाजपा सांसदों की मांग
भाजपा सदस्यों ने कहा कि ऐतिहासिक कारणों से हटाए गए पदों को अब दोबारा शामिल करने का वक्त आ गया है, ताकि गीत का मूल स्वरूप वापस लौट सके।
विपक्ष ने दिया करारा जवाब
कांग्रेस ने सत्ताधारी सरकार आरोप लगाया कि इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है। वहीं प्रियंका गांधी ने कहा कि वंदे मातरम आज भी पूरे देश में उतनी ही श्रद्धा से गाया जाता है। फिर इसे विवाद बनाने की जरूरत क्यों?
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उन्होंने आरोप लगाया कि यह मुद्दा पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले राजनीतिक लाभ के लिए उछाला जा रहा है।
तो वहीं गौरव गोगोई ने इसे “इतिहास को फिर से लिखने का प्रयास” बताया और कहा कि 1937 का फैसला उस समय की “सामाजिक-धार्मिक संवेदनशीलता और समावेशी दृष्टिकोण” के तहत लिया गया था।








