Goa: गोवा के अरपोरा में शनिवार की रात आखिर ऐसा क्या हुआ कि कुछ ही मिनटों में एक चमकती-दमकती रात चीखों और अफरा-तफरी में बदल गई? उस क्लब में मौजूद लोग डांस फ्लोर पर थे, लाइटें चमक रही थीं, DJ सेटअप तैयार था और अचानक सब कुछ धुएं में गायब हो गया। इस भीषण घटना में 25 लोगों की जान गई और अब चर्चाएं सिर्फ एक बात पर अटकी हैं क्या ये हादसा था या लापरवाही की कीमत ?
हादसा कैसे हुआ था?
पुलिस और फायर डिपार्टमेंट की शुरुआती जांच में सामने आया कि आग रात करीब 11:45 बजे क्लब के किचन एरिया में लगी। कुछ लोगों ने बताया कि उन्होंने तेज धमाके जैसी आवाज सुनी, जिसके बाद आग तेजी से फैलती चली गई।
क्लब में धुआं इतना जल्दी भर गया कि लोग एग्जिट ढूंढ ही नहीं पाए। कुछ लोग फर्श पर गिर पड़े, कुछ बेहोश हो गए और कुछ ने खिड़कियों के रास्ते बाहर निकलने की कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
क्यों नहीं पहुंच पाया फायर ब्रिगेड?
हादसे के बाद सबसे गंभीर सवाल यही उठ रहा है कि अगर आग लगने की सूचना समय पर दी गई थी तो बचाव में इतनी देरी क्यों हुई। क्लब इतनी तंग और भीड़ वाली गली में बना था कि फायर टेंडर वहां तक नहीं पहुंच पाए। पानी के टैंकरों को करीब 400 मीटर पहले रोकना पड़ा और रेस्क्यू टीम को पैदल अंदर जाना पड़ा। अगर रास्ता खुला होता, एग्जिट सही से बनाया जाता या फायर सिस्टम चालू होता शायद इतने लोग बच सकते थे।
पहचान और सरकार की पहली प्रतिक्रिया
गोवा सरकार ने पुष्टि की है कि सभी 25 शवों की पहचान हो चुकी है। इनमें पर्यटक, कर्मचारी और बाहर के राज्यों से काम करने आए लोग शामिल हैं। मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने कहा कि अब यह सिर्फ आग की घटना नहीं रह गई बल्कि एक बड़ी प्रशासनिक विफलता है। उन्होंने साफ कहा कि क्लब ने फायर सेफ्टी के बुनियादी नियमों का पालन नहीं किया था।
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गिरफ्तारियां और कार्रवाई
पुलिस ने नाइट क्लब मैनेजमेंट टीम के चार सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया है जिनमें चीफ जनरल मैनेजर, जनरल मैनेजर, बार मैनेजर और एंट्री मैनेजर शामिल हैं। इसके अलावा तीन सरकारी अधिकारी सस्पेंड कर दिए गए हैं जिन्होंने कथित रूप से नियमों के उल्लंघन के बावजूद क्लब को संचालन की अनुमति दी थी। क्लब और इवेंट आयोजकों के खिलाफ FIR दर्ज हो चुकी है और जांच तेज़ी से आगे बढ़ रही है।








