Moscow: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शुक्रवार, 5 दिसंबर 2025 को मॉस्को स्थित क्रेमलिन प्रेस हॉल में एक भारतीय न्यूज़ चैनल को करीब 100 मिनट लंबा बेहद अहम इंटरव्यू दिया। यह इंटरव्यू रूस समयानुसार शाम 5 बजे और भारतीय समयानुसार रात 7:30 बजे प्रसारित हुआ। पुतिन द्वारा किसी भारतीय चैनल को इतना लंबा और विस्तृत इंटरव्यू देना वैश्विक मीडिया जगत में हलचल का कारण बन गया है। वहीं, इस इंटरव्यू को लेकर पश्चिमी मीडिया हाउस BBC और Al Jazeera ने खुले तौर पर नाराजगी जाहिर की है।
भारतीय मीडिया पर पुतिन का भरोसा
इंटरव्यू के दौरान पुतिन ने भारतीय मीडिया की तारीफ करते हुए कहा, “पश्चिमी मीडिया लंबे समय से एकतरफा नैरेटिव को बढ़ावा देता रहा है। भारत वह मंच है जहां हमारी बात तथ्यात्मक तरीके से दुनिया तक पहुंचती है।”
पुतिन का कहना था कि पश्चिमी देशों में मीडिया पक्षपातपूर्ण ढंग से खबरें पेश करता है, जबकि भारतीय मीडिया संतुलित और तथ्य आधारित रिपोर्टिंग करता है। उनका यह बयान अंतरराष्ट्रीय मीडिया राजनीति में एक बड़ा संदेश माना जा रहा है।
भारत–रूस संबंधों पर पुतिन का बड़ा बयान
पुतिन ने भारत और रूस के रिश्तों को लेकर बेहद भावुक और मजबूत शब्दों में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, “भारत हमारे लिए सिर्फ एक राजनीतिक साझेदार नहीं है, बल्कि एक ऐसा दोस्त है, जिस पर हम मुश्किल वक्त में भी भरोसा कर सकते हैं।”
इस बयान से यह साफ झलकता है कि रूस भारत को केवल रणनीतिक साझेदार नहीं, बल्कि एक भरोसेमंद मित्र देश के रूप में देखता है।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि वैश्विक दबावों और चुनौतियों के बावजूद भारत–रूस की दोस्ती और सहयोग आने वाले समय में और मजबूत होगा।
रूस–यूक्रेन युद्ध पर पश्चिम को ठहराया जिम्मेदार
इंटरव्यू में रूस–यूक्रेन युद्ध को लेकर भी पुतिन ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने इस संघर्ष के लिए पश्चिमी देशों को जिम्मेदार ठहराया। पुतिन ने कहा, “मैं किसी युद्ध का समर्थन नहीं करता, लेकिन अपने देश की सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना मेरी जिम्मेदारी है।” उन्होंने यह भी कहा कि रूस पर लगातार दबाव बनाकर परिस्थितियों को युद्ध की ओर धकेला गया।
इंटरव्यू में किन मुद्दों पर हुई चर्चा?
इस ऐतिहासिक इंटरव्यू में कई अहम वैश्विक मुद्दों पर बात हुई, जिनमें प्रमुख रहे:
- भारत–रूस के द्विपक्षीय संबंध
- रूस–यूक्रेन युद्ध
- पश्चिमी देशों की भूमिका
- वैश्विक राजनीति में भारत की बढ़ती ताकत
- मीडिया की स्वतंत्रता और निष्पक्षता
भारतीय मीडिया के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि
जिस तरह से रूस के राष्ट्रपति ने भारतीय न्यूज़ चैनल को प्राथमिक मंच के रूप में चुना, उसे भारतीय मीडिया के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। यह कदम न सिर्फ भारत की वैश्विक कूटनीतिक ताकत को दर्शाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि भारत अब अंतरराष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में आ चुका है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि पुतिन का यह इंटरव्यू भारत और रूस के रिश्तों को नई ऊंचाई दे सकता है। साथ ही यह पश्चिमी मीडिया के वर्चस्व को सीधी चुनौती भी माना जा रहा है।
क्यों नाराज़ हुआ पश्चिमी मीडिया?
BBC और Al Jazeera जैसे संस्थानों की नाराजगी का कारण यह माना जा रहा है कि पुतिन ने उनकी जगह एक भारतीय मंच को चुना और पश्चिमी मीडिया के कामकाज पर सीधे सवाल खड़े कर दिए। इससे वैश्विक मीडिया संतुलन को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है।








