New Delhi: भारत हर साल 26 नवंबर को संविधान दिवस मनाता है। यह केवल एक तिथि नहीं, बल्कि उस यात्रा का स्मरण है जिसने भारत को लोकतांत्रिक राष्ट्र के रूप में स्थापित किया। अक्सर यह सवाल उठता है कि जब संविधान का प्रारूप तैयार करने के लिए सात लोगों की ड्राफ्टिंग कमेटी बनाई गई थी, तो फिर भारत के संविधान का विस्तृत मसौदा मुख्य रूप से डॉ. भीमराव आंबेडकर ने ही क्यों लिखा। इसके पीछे गहरी ऐतिहासिक परिस्थितियां थीं, जिसने यह दायित्व लगभग पूरी तरह उनके हाथों में सौंप दिया।
संविधान सभा की पहली बैठक और तीन साल की कठिन मेहनत
भारतीय संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसंबर 1946 को हुई। इसके बाद लगभग 3 वर्षों तक कुल 167 बैठकें हुईं। इस दौरान ड्राफ्टिंग कमेटी की जिम्मेदारी थी कि वह संविधान का विस्तृत प्रारूप तैयार करे। समिति की अध्यक्षता डॉ. आंबेडकर कर रहे थे, लेकिन बाकी सदस्यों की सक्रियता धीरे-धीरे कम होती चली गई।
आंबेडकर क्यों बने एकमात्र सक्रिय सदस्य?
संविधान सभा में 300 से अधिक सदस्य मौजूद थे, लेकिन डॉ. आंबेडकर की भूमिका इसलिए सबसे महत्वपूर्ण मानी गई क्योंकि:
1. विधिक ज्ञान और सामाजिक समझ
एक विधिवेत्ता, अर्थशास्त्री और समाज सुधारक के रूप में आंबेडकर भारतीय समाज की जटिलताओं को गहराई से समझते थे। उन्होंने ऐसा संविधान बनाया जो कानूनी, सामाजिक और सांस्कृतिक संतुलन का आदर्श रूप है।
2. प्रस्तावना: भारत की आत्मा
स्वतंत्रता, समानता, न्याय और बंधुत्व की अवधारणा को भारतीय परंपरा से जोड़कर प्रस्तुत किया गया।
3. सामाजिक न्याय का आधार
आंबेडकर ने वंचित, पिछड़े और कमजोर वर्गों के लिए सकारात्मक कार्रवाई (आरक्षण) को संविधान का हिस्सा बनाया, जिससे भारत में सामाजिक समानता की नींव पड़ी।
4. हर नागरिक के लिए समान अधिकार
उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि धर्म, जाति, भाषा या क्षेत्र के आधार पर किसी के साथ भेदभाव न हो।
National Constitution Day 2025: भारत के संविधान से जुड़ी 7 रोचक बातें जो हर भारतीय को जाननी चाहिए
भारत आज दुनिया का सबसे बड़ा स्थिर लोकतंत्र
भारत आज दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है। इसका श्रेय उस मजबूत संविधान को जाता है, जिसकी नींव डॉ. आंबेडकर ने रखी। संविधान दिवस हमें याद दिलाता है कि यह केवल कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि भारत की आत्मा, विचार और संकल्प का प्रतीक है।








