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भारत का नया 1000 किलो DRDO ग्लाइड बम हुआ टेस्ट, क्या पाकिस्तान की बढ़ेगी टेंशन?

On: November 23, 2025 9:46 AM
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DRDO
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New Delhi: भारत अपनी रक्षा क्षमताओं को तेजी से मजबूत कर रहा है और इसी दिशा में DRDO ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। भारतीय वायुसेना के Su-30MKI फाइटर जेट से स्वदेशी एयर-लॉन्च्ड लॉन्ग रेंज ग्लाइड बम ‘गौरव’ का सफल परीक्षण किया गया। यह तकनीक भारत को आधुनिक युद्ध प्रणाली में और अधिक सक्षम बनाती है। ‘गौरव’ बम का सबसे खास पहलू यह है कि यह विमान को खतरे से दूर रखते हुए दुश्मन के लक्ष्य पर सटीक प्रहार करता है।

‘गौरव’ बम हवा में छोड़े जाने के बाद लंबी दूरी तक ग्लाइड करता है और निशाने पर अत्यंत सटीकता से हमला करता है। यह तकनीक उसे ऐसे हथियारों की श्रेणी में शामिल करती है जो दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को चुनौती देने में सक्षम होते हैं। इसके भारी पेलोड और मजबूत विनाशक क्षमता के कारण यह बंकरों, किलेबंद ठिकानों और पहाड़ी क्षेत्रों में मौजूद टारगेट को नष्ट करने में प्रभावी माना जा रहा है।

दो संस्करणों में लॉन्च किया गया ‘गौरव’

DRDO ने इस ग्लाइड बम को दो अलग-अलग रूपों में विकसित किया है। पहला संस्करण Gaurav-PCB है, जिसे खास तौर पर सख्त संरचनाओं और बंकरों को भेदने के लिए तैयार किया गया है। यह पहाड़ी ऑपरेशन या दुर्गम इलाकों में होने वाली लड़ाई में सेना की क्षमता बढ़ाएगा। दूसरा संस्करण Gaurav-PF है, जिसका उपयोग दुश्मन की खुली तैनाती, रणनीतिक ठिकानों या बड़े क्षेत्र को नुकसान पहुंचाने जैसे मिशन में किया जा सकता है। दोनों मॉडल आधुनिक युद्ध की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं।

Su-30MKI के साथ शक्ति में और बढ़ोतरी

भारतीय वायुसेना का Su-30MKI पहले से ही कई उन्नत हथियार प्रणालियों जैसे Rudram मिसाइल, SAAW और BrahMos-A से लैस है। अब ‘गौरव’ के जुड़ने के बाद यह लड़ाकू विमान लंबी दूरी से जमीन पर निशाना साधने में और ज्यादा सक्षम हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह संयोजन वायुसेना की स्ट्राइक रेंज, प्रिसिजन अटैक क्षमता और रणनीतिक ताकत को एक नई दिशा देगा।

भारत क्यों बढ़ा रहा है स्वदेशी हथियारों पर फोकस

लंबे समय तक भारत लड़ाकू विमान इंजन और कुछ महत्वपूर्ण हथियार तकनीक के लिए विदेशी कंपनियों पर निर्भर रहा है। इसी वजह से तेजस Mk2 और AMCA जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट में देरी भी हुई। अब सरकार और DRDO दोनों स्वदेशी इंजन, बम, मिसाइल, रडार और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर तकनीक को देश में विकसित करने पर तेजी से काम कर रहे हैं। लक्ष्य यह है कि आने वाले वर्षों में भारत अपनी सैन्य जरूरतों में पूरी तरह आत्मनिर्भर बन सके।

एक्सपर्ट्स की प्रतिक्रिया

रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ‘गौरव’ का सफल परीक्षण भारत की बदलती सैन्य रणनीति का संकेत है। आधुनिक युद्ध में वही देश मजबूत माना जाता है जो दूर से सटीक प्रहार करने की क्षमता रखता हो। ‘गौरव’ ग्लाइड बम इस दिशा में भारत की शक्ति को बढ़ाता है और आने वाले समय में यह वायुसेना का बड़ा रणनीतिक हथियार साबित होगा।

Ismita Srivastava

इस्मिता श्रीवास्तव हिंदी पत्रकारिता में एक वर्षों का अनुभव रखती हैं। उन्होंने कई प्रमुख मीडिया संस्थानों में कार्य किया है। वर्तमान में वे Aaj Ka Aaina के लिए मनोरंजन और लाइफस्टाइल तथा अन्य विषयों पर तथ्यपूर्ण और रोचक लेख लिखती हैं।

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