New Delhi: पिछले हफ़्ते भारत में सोने की कीमतों में मिला-जुला उतार-चढ़ाव दिखा। हफ़्ते की शुरुआत गिरावट के साथ हुई, बीच में यह स्थिर रहा और फिर आखिर में इसमें थोड़ी बढ़ोतरी देखी गई। यह उतार-चढ़ाव कई वजहों से जुड़ा था, जिसमें ग्लोबल मार्केट की हालत, इन्वेस्टर का सेंटिमेंट और रुपये का कमज़ोर होना शामिल है।
सोने की कीमतों में गिरावट
हफ़्ते की शुरुआत 18 नवंबर को कमज़ोरी के साथ हुई। त्योहारों के मौसम के बाद डिमांड में कमी के कारण सोने की कीमतों में गिरावट आई। 24 कैरेट सोने की कीमतें गिरकर लगभग ₹12,366 प्रति ग्राम पर आ गईं। इसी तरह, 22 कैरेट और 18 कैरेट सोने की कीमतों में भी गिरावट आई। शुरुआती कमज़ोरी ने इन्वेस्टर की सावधानी बढ़ा दी, जिससे मार्केट का सेंटिमेंट धीमा हो गया।
मेट्रो शहरों में गोल्ड की कीमत
19 नवंबर को कीमतों में थोड़ी बढ़ोतरी देखी गई। सभी कैरेट कैटेगरी में थोड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे पता चलता है कि शुरुआती बिकवाली का दबाव कम हो रहा है। हालांकि, 20 नवंबर को सोने की कीमतों में थोड़ी नरमी आई और बड़े शहरों में 24 कैरेट सोना ₹12,470 से ₹12,490 प्रति ग्राम की रेंज में स्थिर रहा। मेट्रो शहरों में कीमतों में मामूली बदलाव हुए, जिससे मार्केट का ट्रेंड लगभग एक जैसा रहा।
मार्केट एक्सपर्ट्स का क्या है कहना
तस्वीर 21 नवंबर को बदलनी शुरू हुई। ग्लोबल इकोनॉमिक सिग्नल स्थिर होने और सेफ-हेवन की ओर थोड़ा बदलाव होने से सोने की कीमतों में धीमी लेकिन पॉजिटिव बढ़ोतरी हुई। मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, मार्केट ने शुरुआती कमजोरी को झेल लिया था, और खरीदार धीरे-धीरे वापस आ रहे थे।
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सोने की कीमतों में सुधार 22 नवंबर को ज़्यादा साफ़ दिखा। हालांकि टैक्स और प्रीमियम की वजह से शहरों में कीमतें अलग-अलग थीं, लेकिन कुल मिलाकर 24-कैरेट सोने में लगातार बढ़ोतरी होती रही। यह बढ़ोतरी रुपये की कमजोरी, ग्लोबल अनिश्चितताओं और इंटरनेशनल सोने की कीमतों में मजबूती से जुड़ी थी।
पिछले पूरे हफ्ते सोने की कीमत
पिछले पूरे हफ्ते सोने की कीमतों पर कई फैक्टर्स का असर पड़ा। इंटरनेशनल इंटरेस्ट रेट्स, US की इकोनॉमिक स्थिति और जियोपॉलिटिकल टेंशन को लेकर बदलती उम्मीदों ने इन्वेस्टर्स को सावधान रखा। डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में गिरावट ने भी सोने की कीमतों को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। चूंकि भारत सोने का एक बड़ा इंपोर्टर है, इसलिए कमजोर रुपये से सोने के इंपोर्ट की लागत बढ़ जाती है, जिसका सीधा असर घरेलू कीमतों पर पड़ता है।
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इसके बावजूद, ज्वेलरी की डिमांड ठीक-ठाक रही। इससे सोने की कीमतों में तेज़ बढ़ोतरी रुक गई, लेकिन हफ़्ते के आखिर में रिकवरी से बाज़ार कुछ हद तक स्थिर हो गया। एक्सपर्ट्स का मानना है कि ग्लोबल संकेत, इंटरेस्ट रेट की उम्मीदें और रुपये की चाल आने वाले दिनों में सोने की कीमतों की दिशा तय करेगी। अगर इंटरनेशनल मार्केट में सोना मज़बूत रहता है और रुपया कमज़ोर रहता है, तो कीमतों में और बढ़त देखने को मिल सकती है।








