New Delhi: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार, 20 नवंबर को दिल्ली दंगों से जुड़े मामलों में ज़मानत याचिकाओं पर सुनवाई की। दिल्ली पुलिस ने उमर खालिद, शरजील इमाम, गुलफिशा फातिमा, मीना हैदर और दूसरे आरोपियों की याचिकाओं का कड़ा विरोध किया। पुलिस ने कोर्ट के सामने दावा किया कि जब पढ़े-लिखे लोग कट्टरपंथी गतिविधियों में शामिल होते हैं, तो उनका असर और नुकसान कहीं ज़्यादा होता है।
दिल्ली पुलिस का दावा
एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि एक चिंताजनक ट्रेंड सामने आ रहा है जिसमें कई पढ़े-लिखे लोग, सरकारी पैसे से पढ़ाई करके, डॉक्टर और इंजीनियर बन जाते हैं और बाद में देश विरोधी गतिविधियों में शामिल हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग अपनी बुद्धि और काबिलियत का इस्तेमाल खतरनाक योजनाओं में करते हैं, जिससे उनका असर बढ़ता है।
उन्होंने हरियाणा में अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े हालिया व्हाइट-कॉलर टेरर मॉड्यूल का भी ज़िक्र किया, जहाँ से 2,900 किलोग्राम विस्फोटक बरामद किए गए थे। अगले दिन, आरोपी डॉ. उमर नबी ने लाल किले के पास एक कार बम धमाका किया, जिसमें 14 लोग मारे गए। कोर्ट में शरजील इमाम के भाषणों के वीडियो क्लिप चलाए गए।
सुनवाई के दौरान, पुलिस ने शरजील इमाम के भाषणों के वीडियो क्लिप चलाए। इनमें उसने असम को भारत से काटने, दिल्ली की पानी की सप्लाई रोकने और पूरे देश में ट्रैफिक जाम लगाने की बात कही। पुलिस ने आरोप लगाया कि शरजील अपने भाषणों के ज़रिए एक खास समुदाय को भड़काने और हिंसा भड़काने की कोशिश कर रहा था।
वीडियो में, शरजील ने कोर्ट पर भरोसा न करने और सरकार को “निष्क्रिय” करने की भी बात कही, जिसे पुलिस ने “बहुत ज़्यादा और भड़काने वाला एजेंडा” बताया।
दिल्ली दंगा केस क्या है?
दिल्ली दंगा केस फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा से जुड़ा मामला है। यह हिंसा नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और NRC के विरोध व समर्थन के दौरान शुरू हुए तनाव के बाद भड़की थी। तीन दिनों तक चले इन दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी और 400 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। बड़े पैमाने पर दुकानें, घर, वाहन और धार्मिक स्थल भी नुकसान का शिकार हुए।
CAA विरोध
दिल्ली पुलिस ने यह भी कहा कि 2020 के एंटी-CAA विरोध प्रदर्शनों ने एक लोकतांत्रिक आंदोलन की आड़ में सरकार बदलने और भारत की आर्थिक गतिविधियों को बाधित करने की कोशिश की। ASG राजू ने दावा किया कि पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे के दौरान विरोध प्रदर्शनों को तेज़ किया गया ताकि इंटरनेशनल मीडिया का ध्यान खींचा जा सके और देश की इमेज को नुकसान पहुंचाया जा सके।
बचाव पक्ष की आपत्ति
शरजील इमाम के वकील सिद्धार्थ दवे ने पुलिस के आरोपों को झूठा बताया। उन्होंने कहा कि लंबे भाषणों के छोटे हिस्से दिखाकर कोर्ट को गुमराह करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने दलील दी कि पूरा कॉन्टेक्स्ट बताए बिना किसी को भी दोषी ठहराना गलत है।
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सुनवाई जारी, अगले ऑर्डर का इंतज़ार
कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं और आगे की सुनवाई के लिए तारीख तय की। बेल पर फैसला अभी बाकी है, और मामले में अगली सुनवाई अहम मानी जा रही है।








